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आंदोलन का 58वां दिन : सरकार से 11वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही, मंत्री मीटिंग छोड़कर चले गए, किसान नेता लौटने का इंतजार करते रहे


हाईलाइट

  • किसान आंदोलन का 58वां दिन
  • सरकार से 11वें दौर की वार्ता
  • कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की कानूनी गारंटी की मांग

नई दिल्ली (आईएएनएस)। किसान आंदोलन का शुक्रवार को 58वां दिन है और प्रदर्शनकारी किसान तीनों केंद्रीय कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े हुए हैं। सरकार के साथ आज (शुक्रवार) किसान यूनियनों की 11वें दौर की वार्ता विज्ञान भवन में दोपहर 12 बजे से शुरू हुई, लेकिन आज भी कोई नतीजा नहीं निकला। हालात यहां तक पहुंच गए कि मंत्री मीटिंग छोड़कर ही चल दिए और किसान नेता उनके लौटने की इंतजार करते रहे। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का का कहना है कि लंच ब्रेक से पहले, किसान नेताओं ने काले कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग दोहराई और सरकार ने कहा कि वे संशोधन के लिए तैयार हैं। मंत्री ने हमें सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा और हमने उन्हें हमारे विचार पर चर्चा करने के लिए कहा। उसके बाद, मंत्री बैठक छोड़कर चले गए। 

सरकार के साथ 11वें दौर की बैठक में शामिल होने के लिए सिंघु बॉर्डर से रवाना होने से पहले पंजाब के किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह ने आईएएनएस को बताया कि आज की वार्ता में भी वह केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग करेंगे।

उन्होंने बताया कि धरना-प्रदर्शन पर बैठे किसानों ने सरकार द्वारा नये कानून के अमल पर रोक लगाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उन्हें यह प्रस्ताव मंजूर नहीं है और वे चाहते हैं कि तीनों कानून वापस लिए जाएं। सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों में शामिल पंजाब के रोपड़ के गुरमीत सिंह ने कहा कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं होंगे तब तक किसानों का यह आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली की सीमाओं पर स्थित सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर किसान करीब दो महीने से डेरा डाले हुए हैं।

गुरमीत सिंह से जब पूछा कि धरना-प्रदर्शन से खेती-किसानी का उनका काम प्रभावित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों का कोई काम नहीं रूकता है। खेती-किसानी का काम समय पर हो रहा है और वह जब धरना पर बैठे हैं तो उनका बेटा खेती का काम संभाल रहा है।

गुरमीत सिंह की ही तरह प्रदर्शन में शामिल अन्य किसानों का भी यही कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं होंगे उनका आंदोलन जारी रहेगा। केंद्र सरकार ने पिछली वार्ता में किसान यूनियनों को एक प्रस्ताव दिया था कि अगर किसान आंदोलन वापस लेने पर विचार करें तो सरकार तीनों कानूनों के कार्यान्वयन को एक से डेढ़ साल तक स्थगित कर सकती है और इस बीच सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाकर एमएसपी समेत तमाम मसलों का समाधान निकाला लिया जाएगा।

इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने गुरुवार को कहा कि नये कृषि कानून पर सरकार का प्रस्ताव उसे मंजूर नहीं है। आंदोलनरत किसानों की मांगों को लेकर सरकार के साथ 11वें दौर की वार्ता से एक दिन पहले मोर्चा ने एक बयान में कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा में सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया।

केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को निरस्त करने और तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर 2020 से किसान डेरा डाले हुए हुए हैं।

इन कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी के अपने एक आदेश के जरिए बहरहाल रोक लगा दी है और एक विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर इन पर सुझाव देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने किसान संगठनों के साथ संपर्क करना शुरू कर दिया है, लेकिन आंदोलनकारी किसान संगठनों को कमेटी में जाना स्वीकार्य नहीं है।

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