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गौतमबुद्धनगर : 12 साल की निहारिका गुल्लक में बचे 17 हजार रुपये भी जरूरतमंदों पर खर्चना चाहती हैं

June 02nd, 2020 17:01 IST
 गौतमबुद्धनगर : 12 साल की निहारिका गुल्लक में बचे 17 हजार रुपये भी जरूरतमंदों पर खर्चना चाहती हैं

हाईलाइट

  • गौतमबुद्धनगर : 12 साल की निहारिका गुल्लक में बचे 17 हजार रुपये भी जरूरतमंदों पर खर्चना चाहती हैं

गौतमबुद्धनगर (नोएडा), 2 जून (आईएएनएस)। कोरोनावायरस के प्रकोप से आम जन जीवन कितना प्रभावित हुआ है, इसका अंदाजा हर किसी को है। लेकिन इस संकट की घड़ी में लोग एक-दूसरे का हाथ भी बंटा रहे हैं। नोएडा की एक 12 साल की बच्ची ने झारखंड के रहने वाले एक श्रमिक परिवार अपने गुल्लक के पैसों से फ्लाइट के जरिए घर भेजा, और अब वह गुल्लक के बचे 17 हजार रुपये भी जरूरतमंदों पर खर्च कर देना चाहती है।

निहारिका द्विवेदी की उम्र महज 12 साल है। वह नोएडा सेक्टर-50 में रहती हैं, और कक्षा सातवीं की छात्रा हैं। निहारिका ने आईएएनएस को बताया, मैं लॉकडाउन में न्यूज देख रही थी। हर जगह माइग्रेंट्स के बारे में दिखा रहे थे। देखते देखते मुझे मेरी दादी की एक बात याद आ गई। मेरी दादी कहती हैं कि किसी के इमोशन जानने हैं तो उसकी आंखों मे देखो, तुम्हें उनका दुख पता चलेगा।

निहारिका ने कहा, प्रवासी श्रमिकों ने हमारी सोसाइटी डेवलप करने के लिए बहुत कुछ किया है, अब जब उन्हें जरूरत है तो हमें उनकी मदद करनी चाहिए। इस बारे में मैंने अपने माता-पिता से बात की तो उन्होंने मुझे सहयोग किया। फिर हमने एक एनजीओ से संपर्क किया और कुछ फोन किए तो मुझे झारखंड के एक परिवार के बारे में पता चला, जिसमें पति-पत्नी और उनकी बेटी थी, जो कि दिल्ली के एक शेल्टर होम में रह रहे थे और घर जानना चाहते थे।

दरअसल, झारखंड के इस परिवार के तीन सदस्य प्यारी कोल, उसकी पत्नी शुशीला और बेटी काजल नोएडा में रहकर मजदूरी करते थे, और अपना गुजर-बसर करते थे। प्यारी कोल कैंसर से पीड़ित था और उसका इलाज चल रहा था। लॉकडाउन में काम बंद होने की वजह से तीनों बेरोजगार हो गए। किसी तरह दिल्ली पहुंचे, लेकिन आगे का कोई साधन नहीं मिल पाया। जिसकी वजह से वे शेल्टर होम में दिन गुजार रहे थे।

निहारिका ने बताया, मुझे पता चला कि लड़की के पिता को कैंसर है, जिसकी वजह से उनकी जमीन तक बिक गई है। इसके बाद मैंने अपनी गुल्लक तोड़ी और उनके घर भेजने के लिए रांची तक फ्लाइट के टिकट बुक किए।

निहारिका के पिता गौरव द्विवेदी ने कैब बुक कर इस परिवार को शेल्टर होम से एयरपोर्ट तक पहुंचाया। रविवार शाम 5.30 बजे तीनों ने दिल्ली से रांची के लिए उड़ान भरी।

गौरव द्विवेदी ने बताया, गुल्लक में कुल 48,530 रुपये थे। लगभग 20000 रुपये टिकट में लगे और हमने उनको 10 हजार रुपये नकद भी दिए, साथ ही खाने के पैकेट भी।

निहारिका ने आगे कहा, मेरी गुल्लक में अभी लगभग 17 हजार रुपये बचे हुए हैं, और मैं इन पैसों से मैं किसी और जरूरतमंद की मदद करूंगी। मेरी मां ने मुझे कहा है कि हम फिर से गुल्लक में पैसे जमा करने शुरू करेंगे।

समाजसेवा का उदाहरण पेश करने वाली निहारिका बड़े होकर आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हैं, और लोगों की सेवा करना चाहती हैं। वह सेना में भी जाने की इच्छा रखती हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।