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हार्दिक पटेल ने 19वें दिन तोड़ा अनशन, लिखा- जिंदा रहकर लड़ाई लड़नी है

September 12th, 2018 22:34 IST
हार्दिक पटेल ने 19वें दिन तोड़ा अनशन, लिखा- जिंदा रहकर लड़ाई लड़नी है

हाईलाइट

  • हार्दिक का अनशन 19वें दिन खत्म, 25 अगस्त से अनशन पर बैठे थे
  • किसानों की कर्जमाफी और पाटीदार समाज को आरक्षण दिए जाने की मांग पर किया था अनशन

डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। किसानों की कर्जमाफी और पाटीदार समाज को आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर चल रहा हार्दिक पटेल का अनशन आज (बुधवार) खत्म हो गया। दोपहर करीब 3 बजे खोडलधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश पटेल, उमाधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रहलाद पटेल ने हार्दिक पटेल को नारियल पानी पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया। बता दें कि आज हार्दिक के अनशन का 19वां दिन था। वे अपनी मांगों को लेकर 25 अगस्त से अनशन पर बैठे थे।

इससे पहले हार्दिक ने एक ट्वीट कर अनशन खत्म करने का ऐलान किया था। उन्होंने लिखा था, 'किसानों एवं समाज की कुलदेवी श्री उमिया माताजी मंदिर-उंझा और श्री खोड़ल माताजी मंदिर-कागवड के प्रमुख लोगों ने मुझे कहा कि तुम्हें जिंदा रहकर लड़ाई लड़नी है। सब का सम्मान करते हुए अनिश्चितकालिन उपवास आंदोलन के आज उन्नीसवें दिन दोपहर तीन बजे उपवास आंदोलन खत्म करूंगा।'

गौरतलब है कि आरक्षण और किसानों की कर्जमाफी को लेकर हार्द‍िक पटेल पहले भी आंदोलन करते रहे हैं। इस बार उन्होंने अनशन का रास्ता चुना। पिछले 18 दिनों से उनके इस अनशन में कई अन्य दलों के नेता शामिल हो चुके हैं। इसमें हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत व छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी के नाम शामिल हैं। अनशन के दौरान हार्दिक की तबीयत भी खराब हुई थी। हड़ताल के 14वें दिन यानि 8 सितंबर को उन्हें हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया गया था, जहां पर दो दिन रहने के बाद वे बाहर आए थे। इस दौरान विपक्षी दलों के कई नेता उनका हालचाल पूछने हॉस्पिटल पहुंचे थे। डीएमके नेता ए राजा, जदयू से बर्खास्त शरद यादव, स्वामी अग्निवेश आदि लोग भी उनसे मिलने आए थे।

हार्दिक की मांग थी कि गुजरात में क‍िसानों का कर्ज माफ क‍िया जाए और पाटीदार समुदाय के लोगों को आरक्षण म‍िले। हालांकि सरकार की ओर से उनकी मांगों के सम्बंध में कोई बयान नहीं आया। हार्दिक को अपनी मांग पर किसी तरह का आश्वासन नहीं मिला और स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें अपना अनशन बिना मांग पूरी हुए ही खत्म करना पड़ा। हार्दिक के करीबियों के अनुसार, वे अनशन जारी रखना चाहते थे, लेकिन डॉक्टरों की सलाह थी कि वे अनशन खत्म करें क्योंकि उनके स्वास्थ्य पर इस अनशन का बूरा असर पड़ रहा है। डॉक्टरों की सलाह मानते हुए ही हार्दिक को अनशन खत्म करने का फैसला लेना पड़ा।

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tiger September 13th, 2018 08:38 IST

Gaandu saala zinda rehkar nahi saale ye bol ki gaand fat gayi

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।