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जम्मू कश्मीर: विशेष राज्य वाले आर्टिकल 35-A पर अब 19 जनवरी को सुनवाई

August 31st, 2018 17:37 IST
जम्मू कश्मीर: विशेष राज्य वाले आर्टिकल 35-A पर अब 19 जनवरी को सुनवाई

हाईलाइट

  • इससे पहले 6 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन 3 जजों की पीठ में 1 के ना होने के चलते सुनावई नहीं हो पाई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट में We the Citizens और वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी ने याचिका दायर की थी।
  • सुनवाई का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि 35-A हटाने से धारा 370 भी खत्म हो जाएगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से जुड़े आर्टिकल 35A को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी तक टाल दी है। SC में शुक्रवार को आर्टिकल 35-A की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। जम्मू कश्मीर में होने वाले पंचायत चुनावों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी के दूसरे पखवाड़े में अगली सुनवाई का निर्णय लिया। जम्मू कश्मीर की तरफ से पैरवी कर रहे तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि सभी सुरक्षा बल इस समय स्थानीय निकाय चुनाव की सुरक्षा में व्यस्त हैं, इसलिए सुनवाई को चुनाव तक टाल दिया जाए। इसके बाद अदालत ने 19 जनवरी तक के लिए सुनवाई को टाल दिया। इससे पहले 6 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन 3 जजों की पीठ में 1 के ना होने के चलते सुनवाई नहीं हो पाई थी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में We the Citizens और वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी ने याचिका दायर की थी। याचिका में राज्य के विशेष नागरिकता कानून 35-A को हटाने की मांग है। सुनवाई का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि 35-A हटाने से धारा 370 भी खत्म हो जाएगी। इससे जम्मू-कश्मीर और भारत के बीच विलय भी खत्म हो जाएगा। सुनवाई के विरोध में घाटी में अलगावादियों ने 2 दिन का बंद बुलाया है, जिसे भाजपा को छोड़कर सभी मुख्य विपक्षी पार्टियों का समर्थन है।

हिंसा की आशंका को देखते हुए कश्मीर के 9 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू जारी रहेगा। हुर्रियत नेताओं को अपने घरों में नजरबंद कर दिया गया है। इस मामले में अंतिम सुनवाई 6 अगस्त को की गई थी। सुनवाई के विरोध में अलगाववादी दल हुर्रियत के साथ पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस की जम्मू इकाई सहित माकपा भी बंद का समर्थन कर रही है। सुनवाई के विरोध में कश्मीर के लोंगों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया था। खुद जम्मू-कश्मीर के त्तकालीन राज्यपाल एनएन वोहरा ने सुनवाई को कुछ समय टालने का अनुरोध किया था। राज्यपाल ने इसका कारण वहां होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव को बताया था।


तीसरे जज के न होने से टल रही थी सुनवाई
पिछली सुनवाई में सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा था कि तीसरे जज डीवाई चंद्रचूड़ मौजूद नहीं हैं, ऐसे में मामले की सुनवाई टाल दी गई थी। तीन जजों की बेंच को तय करना है कि इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं। पिछली सुनवाई में कोर्ट में दो जज ही बैठे थे। जबकि इस मामले की तीन जजों की पीठ सुनवाई करती है। सीजेआई दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने कहा था कि मामला पांच जजों की संविधान पीठ को भेजने पर विचार तीन जजों की बेंच ही कर सकती है। सीजेआई ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट इस पर विचार करेगा कि क्या अनुच्छेद 35A संविधान के मूलभूत ढांचे का उल्लंघन तो नहीं करता है, इसमे विस्तृत सुनवाई की जरूरत है। 


क्या है अनुच्छेद 35A?
धारा 35-A में स्थायी नागरिकता पारिभाषित की गई है। इसके मुताबिक स्थाई नागरिक वह है, जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक हो या इससे पहले 10 वर्षों से यहां रह रहा हो। बता दें कि 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आदेश पारित कर भारत के संविधान में नया अनुच्छेद 35A जोड़ा था। कानून के मुताबिक यहां की महिला की अगर राज्य के बाहर शादी करती है तो उसे और उसके बच्चों को जम्मू कश्मीर का नागरिक नहीं माना जाता। इस धारा को निरस्त करने की मांग करने वालों का कहना है कि धारा 368 के तहत संविधान संशोधन के लिए नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे संविधान में नहीं जोड़ा गया था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।