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MP-UP, महाराष्ट्र समेत इन राज्यों में भारी बारिश, 93 की मौत, हाई अलर्ट जारी

MP-UP, महाराष्ट्र समेत इन राज्यों में भारी बारिश, 93 की मौत, हाई अलर्ट जारी

हाईलाइट

  • उत्तर भारत में भारी बारिश का कहर
  • उत्तर प्रदेश में 35 लोगों की मौत
  • उत्तर भारत में दो दिन में 48 लोगों की मौत

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। भारी बारिश ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में एक बार फिर कहर बरपाया है। उत्तर प्रदेश, बिहार में बारिश से अब तक 48 लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले यूपी में शुक्रवार से अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य सरकार ने कहा कि 45 लोगों की मौत शनिवार को हुई, वहीं 35 लोगों की शुक्रवार को जान चली गई थी। वहीं बिहार में कई गांव उफान मारती नदियों की चपेट में आ चुके हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में भी स्थिति सामान्य नहीं है। मध्य प्रदेश कई जिलों में भारी बारिश कौ दौर जारी है। वहीं कई हिस्सों में काले बादलों ने अपना डेरा जमाया हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक सामान्यता मानसून सिंतबर तक लौट जाता है, लेकिन इस बार अक्टूबर महीने शुरु होने में दो एक दिन शेष है और मानसून देश से अब तक विदाई नहीं ली है। 

बिहार
बिहार में 12 इलाकों में शुक्रवार की सुबह साढ़े आठ बजे से शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक 100 मिलीमीटर से अधिक वर्षा हुई है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बारिश से उत्पन्न स्थिति की जानकारी प्राप्त की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बिहार में भारी बारिश 13 लोगों की जान चली गई। यूपी-बिहार को मिलाकर कुल 93 लोगों की जान बीते दो दिन में जा चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक बिहार के अधिकतर इलाकों में अगले 48 घंटे तक मध्यम से भारी बारिश होगी और स्थिति तीन अक्टूबर के बाद सामान्य होगी। पूर्वानुमान में बताया कि मध्य बिहार, पूर्वी बिहार, उत्तर पूर्वी बिहार एवं दक्षिण पूर्वी बिहार में वर्षा की स्थिति बनी रहेगी। भारी बारिश से बिहार में कई नदियों खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ की चपेट आए गांवों में आपदा प्रबंधन की टीम द्वारा राहत बचाव का काम किया जा रहा है। 

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में बारिश के कारण काफी जान-माल का नुकसान हुआ है। पिछले दो दिनों में उत्तर प्रदेश में हुई भयंकर बारिश के कारण अब तक करीब 80 लोगों की जान जा चुकी है। शुक्रवार को भारी ने 35 लोगों की जान ली। वहीं शनिवार को ही राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण 45 लोगों की मौत हो गई है। आजमगढ़ और मिर्जापुर जिले में 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 3 मौतें गाजीपुर और अंबेडकरनगर में हुई हैं। शनिवार शाम 5 बजे तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर, फिरोजाबाद, उन्नाव, बांदा, बलिया और सीतापुर जिले में 2-2 लोगों की मौत हुई है। जबकि बुलंदशहर, अमेठी, सहारनपुर, लखीमपुर, फतेहपुर, प्रयागराज, चित्रकूट, सुल्तानपुर और देवरिया में 1-1 व्यक्ति की मौत हो गई है। उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना की समेत सहायक नदियां उफान पर हैं। गंगा से सटे गांवों में आई बाढ़ ने तबाही मचा दी है। लोगों की बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन और अपदा प्रबंधन की टीम लगी हुई हैं। 

मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित राज्य के कई अन्य हिस्सों में गुरुवार को आंशिक बादल छाए हुए थे। शुक्रवार, शनिवार को भोपाल समेत कई जिलों में जमकर बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग ने 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए यलो एलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण राज्य में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है। बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बादल बरसे। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में अनूपपुर, डिंडोरी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी सहित 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। राज्य के मौसम में बदलाव का दौर जारी है। 

महाराष्ट्र
पुणे में बृहस्पतिवार को आयी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी भी 5 लोग लापता हैं। बता दें कि पुणे और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार और गुरुवार के बीच 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई जिससे कई निचले इलाकों में बाढ़ आ गई। इसके परिणामस्वरूप अधिकारियों ने तीन हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया।अधिकारियों ने बताया कि 16 लोगों की मौत पुणे शहर में हुई, जबकि छह लोग जिले के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ से संबंधित दुर्घटनाओं में मारे गए। उन्होंने बताया कि जिले में पांच लोग लापता हैं. जिला कलेक्टर नवल किशोर राम ने कहा कि तांगेवाला कॉलोनी में बाढ़ प्रभावितों को राहत कोष से चेक सौंपे गए। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।