दैनिक भास्कर हिंदी: COVID-19 Vaccine: रूस की Sputnik-V को बड़े स्तर पर ट्रायल की मंजूरी देने से भारत ने मना किया

October 8th, 2020

हाईलाइट

  • रूस की कोविड-19 वैक्सीन के बड़े स्तर पर ट्रायल की मंजूरी देने से भारत ने मना किया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के ड्रग रेगुलेटर ने रूस की कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक-V के बड़े स्तर पर ट्रायल की मंजूरी देने से मना कर दिया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारतीय फार्मा कंपनी डॉ रेड्डीज  की प्रयोगशालाओं में इस वैक्सीन का पहले छोटा ट्रायल करने को कहा है। सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइेजेशन (सीडीएससीओ) के एक विशेषज्ञ पैनल ने शुरुआती ट्रायल को विदेशी आबादी के एक छोटे समूह पर ही इस्तेमाल करते देखा। उन्होंने नोट किया कि विदेशों में किए प्रारंभिक चरण के अध्ययन में सुरक्षा और इम्युनोजेनेसिटी डेटा काफी छोटा है। इंडियन पार्टसिपेंट पर भी कोई इनपुट उपलब्ध नहीं है। जिसकी वजह से ये फैसला लिया गया है। बता दें कि रूस ने कोविड-19 की पहली प्रभावी वैक्सीन बनाने का दावा किया था। जिसके बाद डॉ रेड्डीज लैब ने स्पुतनिक V वैक्सीन के ट्रायल के साथ-साथ उसके डिस्ट्रीब्यूशन के लिए रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फेंड (RDIF) के साथ हाथ मिलाया है।

रूस ने अपनी कोरोनावायरस वैक्सीन को विदेशों में वितरित करने की योजना बनाई है। ऐसे में रूस के सोवरिन वेल्थ फंड ने भारतीय दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज को अपनी कोरोनावायरस वैक्सीन, स्पुतनिक-V की 100 मिलियन खुराक की आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की थी। रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के भारतीय मैनुफैक्चरर के साथ 300 मिलियन खुराक का उत्पादन करने के एग्रीमेंट के बाद ये डील हुई थी। RDIF ने कहा था, डॉ. रेड्डीज, भारत की शीर्ष दवा कंपनियों में से एक है, जो भारत में वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल करेगी। रूसी फंड ने कहा था कि डिलीवरी संभवत 2020 के अंत में शुरू हो सकती है। स्पुतनिक-V को गैमेलिया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने रशियन डायरेक्ट इवनेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ मिलकर तैयार किया है। इसे 11 अगस्त को रजिस्टर किया गया था। 

कैसे काम करती है रूसी कोरोना वैक्सीन?
रूस की वैक्सीन सामान्य सर्दी जुखाम पैदा करने वाले adenovirus पर आधारित है। इस वैक्सीन को आर्टिफिशल तरीके से बनाया गया है। यह कोरोना वायरस SARS-CoV-2 में पाए जाने वाले स्ट्रक्चरल प्रोटीन की नकल करती है जिससे शरीर में ठीक वैसा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा होता है जो कोरोना वायरस इन्फेक्शन से पैदा होता है। यानी कि एक तरीके से इंसान का शरीर ठीक उसी तरीके से प्रतिक्रिया देता है जैसी प्रतिक्रिया वह कोरोना वायरस इन्फेक्शन होने पर देता लेकिन इसमें उसे COVID-19 के जानलेवा नतीजे नहीं भुगतने पड़ते हैं। मॉस्को की सेशेनॉव यूनिवर्सिटी में 18 जून से क्लिनिकल ट्रायल शुरू हुए थे। 38 लोगों पर की गई स्टडी में यह वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है। सभी वॉलंटिअर्स में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी भी पाई गई है।

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