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भारत में टूटा 25 साल पुराना रिकॉर्ड, इस बार मानसून में औसतन 110% बारिश

भारत में टूटा 25 साल पुराना रिकॉर्ड, इस बार मानसून में औसतन 110% बारिश

हाईलाइट

  • भारत में 25 साल के बाद इस मानसून में सबसे ज्यादा वर्षा हुई है
  • इस साल मानसून सीजन में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) सामान्य का 110% है
  • आधिकारिक तौर पर दक्षिण पश्चिम मानसून सीजन सोमवार को खत्म हो गया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में साल 25 के बाद इस मानसून में सबसे ज्यादा वर्षा हुई है। इस साल मानसून सीजन में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) सामान्य का 110% है। 1994 में ये 112.5% था। आधिकारिक तौर पर दक्षिण पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) सोमवार को खत्म हो गया। हालांकि, मानसून अभी भी देश के कई हिस्सों में सक्रिय है। अब भी उत्तर प्रदेश और बिहार में बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।

इस बार देश में औसतन 968.3 मिलीमीटर बरसात रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने इसे सामान्य से ज्यादा बारिश के रूप में वर्गीकृत किया है। मौसम विभाग के कुल 36 सब डिविजन्स में से 11 सब डिविजन में सामान्य से ज्यादा और 1 सब डिविजन में सामान्य से बहुत ज्यादा बरसात देखने को मिली है। जबकि 20 में नॉर्मल बारिश रिकॉर्ड हुई। 4 सब डिविजन ऐसे हैं जहां पर सामान्य के मुकाबले कम बारिश हुई है। इस साल मानसून सीजन में  लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) सामान्य का 110% है।

मौसम का आकलन करने वाली निजी संस्था स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के मुताबिक 1994 के बाद मानसून सीजन में इतनी ज्यादा बरसात देखने को मिली है। 1994 के मानसून सीजन के दौरान देश में 112.5 प्रतिशत बरसात दर्ज की गई थी।

मध्य भारत में इस साल सबसे ज्यादा सामान्य के मुकाबले 29 प्रतिशत ज्यादा बरसात देखने को मिली है। अकेले मध्य प्रदेश में ही सामान्य के मुकाबले 44 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। 

दक्षिणी प्रायद्वीप में भी सामान्य के मुकाबले 16 प्रतिशत ज्यादा बरसात देखी गई। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य के मुकाबले 12 प्रतिशत कम बरसात देखने को मिली है जबकि उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य के मुकाबले 2 प्रतिशत कम बरसात हुई है। 

दिल्ली में इस सीजन में बारिश में 38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो 2014 के बाद से शहर में सबसे कम है। आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में इस मानसून (1 जून से 30 सितंबर) में 404.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई। दिल्ली में वर्षा का 30 साल का औसत 648.9 मिमी है। पिछले दो वर्षों में राष्ट्रीय राजधानी में सरप्लस वर्षा देखी गई - 2018 में 770.6 मिमी और 2017 में 672.3 मिमी।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।