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भारत ने चीन से कहा, अपनी कार्रवाई का पुनर्मूल्यांकन करें, सुधारात्मक कदम उठाएं

June 17th, 2020 20:32 IST
 भारत ने चीन से कहा, अपनी कार्रवाई का पुनर्मूल्यांकन करें, सुधारात्मक कदम उठाएं

हाईलाइट

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नई दिल्ली/बीजिंग, 17 जून (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को अपने चीनी समकक्ष के साथ हुई फोन वार्ता में चीन से कहा कि वह पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुई अभूतपूर्व हिंसा के मद्देनजर अपनी कार्रवाई का पुनर्मूल्यांकन करे और सुधारात्मक कदम उठाए।

जयशंकर और चीन के स्टेट काउंसलर व विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार अपराह्न् फोन पर, गलवान घाटी में एलएसी के हालात पर चर्चा की, जहां सोमवार को हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए और अज्ञात संख्या में चीनी सैनिक भी मारे गए।

बीजिंग में सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने हालांकि कहा है कि चीन के स्टेट काउंसलर ने जयशंकर के साथ अपनी फोन वार्ता में भारत से कहा कि वह घटना की जांच करे और जो लोग जिम्मेदार हों, उन्हें दंडित करे तथा क्षेत्र में किसी उकसावे की कार्रवाई से बचने के लिए अपने सैन्य बलों को संयम बरतने को कहे।

विदेश मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में जारी बयान के अनुसार, जयशंकर ने अपने समकक्ष के साथ बातचीत में चीन पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर और सुनियोजित कार्रवाई की, जो सीधे तौर पर हिंसा और मौतों के लिए जिम्मेदार थी।

उन्होंने कहा कि यह यथास्थिति अपरिवर्तित रखने से संबंधित हमारे सभी समझौतों का उल्लंघन कर जमीनी सच्चाई को बदले के इरादे को जाहिर करता है।

जयशंकर ने कहा कि इस अभूतपूर्व घटना का द्विपक्षीय रिश्ते पर एक गंभीर असर होगा। उन्होंने वांग से कहा कि समय की जरूरत है कि चीनी पक्ष अपनी कार्रवाइयों का पुनर्मूल्यांकन करे और सुधारात्मक कदम उठाए।

जयशंकर ने सरकार की आपत्ति से अवगत कराया और याद दिलाया कि छह जून को वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव घटाने और गतिरोध समाप्त करने पर एक सहमति बनी थी।

मंत्री ने कहा, ग्राउंड कमांडर पिछले सप्ताह तक इस सहमति को लागू कराने के लिए नियमित तौर पर मुलाकात कर रहे थे। इसमें थोड़ी प्रगति हुई, तबतक चीनी पक्ष ने एलएसी के हमारी तरफ गलवान घाटी में एक ढाचा बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यही विवाद की जड़ बना।

जयशंकर ने वांग से कहा कि दोनों पक्षों को छह जून को वरिष्ठ कमांडरों के बीच बनी सहमति को गंभीरता से लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सैनिकों को द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल्स का भी पालन करना चाहिए।

जयशंकर ने वांग से कहा, उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा का हर हाल में सम्मान करना चाहिए और इसे बदलने की कोई एकतरफा कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

फोनवार्ता दोनों पक्षों के बीच इस सहमति पर समाप्त हुई कि कोई भी पक्ष तनाव बढ़ाने वाली कोई कार्रवाई नहीं करेगा। दोनों इस पर सहमत हुए कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकाल्स के अनुसार शांति एवं सौहाद्र्र सुनिश्चित करेंगे और छह जून को बनी तनाव घटाने की सहमति को गंभीरता से लागू करेंगे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।