दैनिक भास्कर हिंदी: चंद्रयान-2: आज रात चांद पर उतरेगा लैंडर विक्रम, इसरो सेंटर में PM भी रहेंगे मौजूद

September 6th, 2019

हाईलाइट

  • चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरेगा चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम
  • शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात 1.30 से 2.30 बजे के बीच चांद के दक्षिण ध्रुव पर होगी लैंडिंग

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज रात भारत चांद पर एक नया इतिहास रचेगा। चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात 1.30 से 2.30 बजे के बीच चांद पर उतरेगा। लैंडर विक्रम की लैंडिंग चांद के दक्षिण ध्रुव पर होगी। रोवर प्रज्ञान लैंडर विक्रम से सुबह 5.30 से 6.30 के बीच बाहर आएगा। चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के उतरने का सीधा नजारा देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाईस्कूल के करीब 60-70 विद्यार्थियों के साथ बेंगलुरु स्थित इसरो केंद्र में मौजूद रहेंगे।

रोवर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर एक लूनर डे मतलब चांद के एक दिन में ही कई प्रयोग करेगा। चांद का एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है। चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहा ऑर्बिटर एक साल तक मिशन पर काम करता रहेगा। अगर लैंडर विक्रम चंद्रमा की ऐसी सतह पर उतरता है जहां 12 डिग्री से ज्यादा का ढलान है तो उसके पलटने का भी खतरा रहेगा।

लैंडर विक्रम के अंदर ही रोवर प्रज्ञान रहेगा। यह एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से लैंडर से बाहर निकलेगा। इसे निकलने में 4 घंटे लगेंगे। बाहर आने के बाद यह चांद की सतह पर 500 मीटर तक चलेगा। इसके साथ 2 पेलोड भी जा रहे हैं। इनका उद्देश्य लैंडिंग साइट के पास तत्वों की मौजूदगी और चांद की चट्टानों-मिट्टी की मौलिक संरचना का पता लगाना होगा। पेलोड के जरिए रोवर ये डेटा जुटाकर लैंडर को भेजेगा, जिसके बाद लैंडर यह डेटा इसरो तक पहुंचाएगा।

बता दें कि, चंद्रयान-2 भारत का मून-मिशन है जो आज आधी रात चांद के साउथ पोल में उतरेगा। यहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है। अब यह चांद पर ऐसी खोज करेगा जिससे कई छिपी जानकारियां सामने आएंगी। वहां किए गए परीक्षणों से यह भी पता लगेगा कि भविष्य के चांद अभियानों में क्या बदलाव लाने की जरूरत है। आगे किस तकनीक का इस्तेमाल करना है। भारत से पहले अमेरिका, चीन और रूस के यान चांद के दूसरे हिस्से में उतर चुके हैं।

चंद्रयान-2 से चांद की भौगोलिक संरचना, भूकंपीय स्थिति, खनिजों की मौजूदगी और उनके वितरण का पता लगाने, सतह की रासायनिक संरचना का अध्ययन करके चन्द्रमा के अस्तित्व में आने तथा उसके क्रमिक विकास के बारे में नई जानकारियां मिल सकेंगी।

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