comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

जम्मू-कश्मीर: इस साल घाटी में तीसरी बार भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 3.6 मापी गई तीव्रता

जम्मू-कश्मीर: इस साल घाटी में तीसरी बार भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 3.6 मापी गई तीव्रता

हाईलाइट

  • 11 जनवरी की शाम को 5.1 की तीव्रता से डोडा-किश्तवाड़ में भूकंप
  • 4 जनवरी को बंदीपोरा में 3.5 तीव्रता का भूंकप
  • 11 जनवरी की शाम को 5.1 की तीव्रता से डोडा-किश्तवाड़ में भूकंप
  • 4 जनवरी को बंदीपोरा में 3.5 तीव्रता का भूंकप

डिजिटल डेस्क, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में मंगलवार रात करीब 9.13 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फार सिस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 मापी गई है। इससे लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में इस माह तीसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले 16 जनवरी की शनिवार रात 10.01 बजे आए भूकंप की तीव्रता 4.1 रिकॉर्ड की गई। भूकंप का केंद्र डोडा जिले के गंदोह में जमीनी सतह के दस किलोमीटर नीचे था।

11 जनवरी की शाम को 5.1 की तीव्रता से डोडा-किश्तवाड़ में भूकंप 
इससे पहले जम्मू-कश्मीर में 11 जनवरी सोमवार शाम करीब साढ़े 7 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.1 मापी गई थी। जानकारी के अनुसार इसका केंद्र जम्मू के कटरा से 63 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में जमीन से 5 किलोमीटर गहराई में था। भूकंप का सबसे ज्यादा असर उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़ और पुंछ जिलों में रहा। किश्तवाड़ में दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। यहां और ऊधमपुर में भूकंप की दहशत के कारण लोग अपने घरों से बाहर खुले मैदान में निकल आए। 

4 जनवरी को बंदीपोरा में 3.5 तीव्रता का भूंकप
जम्मू-कश्मीर में इस साल दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस हुए हैं। इसके पहले 4 जनवरी को बंदीपोरा में 3.5 तीव्रता का भूंकप आया था। पिछले साल दिसंबर में 4 बार झटके आए थे। 16 दिसंबर तीन बार 4.0, 4.3 और 3.7 की तीव्रता का भूकंप आया था। 21 दिसंबर को भी 3.7 की तीव्रता के झटके महसूस हुए थे।

9 जनवरी को हिमाचल में झटके महसूस हुए थे
शनिवार 9 जनवरी को हिमाचल प्रदेश में कई इलाकों में भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए थे। भूकंप के झटकों के बाद लोग घबराकर अपने घरों से बाहर आ गए थे। भूकंप की तीव्रता 4.2 मापी गई थी। नेशनल सेंटर ऑफ सिस्मोलॉजी के अनुसार, रात करीब 8.22 बजे आए भूकंप का केंद्र कांगड़ा की करेरी लेक में था।


 

कमेंट करें
U3VKy
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।