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Jio इंस्टीट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा देने पर विवाद, सरकार ने दी सफाई

July 10th, 2018 20:16 IST

हाईलाइट

  • HRD मंत्रालय ने Jio इंस्टीट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया।
  • कांग्रेस ने रिलायंस फाउंडेशन के Jio इंस्टीट्यूट के दर्जे पर आपत्ति जताई है।
  • कांग्रेस का दावा- पीएम ने अंबानी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की।
  • सरकार की सफाई- यूजीसी रेगुलेशन के तहत नए संस्थानों को शामिल किया जा सकता है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) की तरफ से देश के 6 इंस्टीट्यूट्स को उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा दिए जाने को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि, पीएम मोदी ने अपने उद्योगपति दोस्त को फायदा पहुंचाने की कोशिश की है। विवाद के बाद एचआरडी मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि यूजीसी रेगुलेशन 2017 के क्लॉज 6.1 के अनुसार इस प्रोजेक्ट में बिल्कुल नए इंस्टीट्यूट को भी शामिल किया जा सकता है।

दरअसल मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के 6 इंस्टीट्यूट्स को उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा देने की घोषणा की गई है। इस लिस्ट में IIT बंबई, IISC बैंगलोर, IIT दिल्ली, मनिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिट्स पिलानी और Jio इंस्टीट्यूट का नाम शामिल है। सरकार के इस फैसले के बाद से ही विपक्ष हमलावर हो गया है। 


कांग्रेस ने रिलायंस फाउंडेशन के Jio इंस्टीट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए सवाल खड़ा किया है कि, जियो इंस्टीट्यूट अब तक बना ही नहीं है तो सरकार कैसे उसे उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दे सकती है। 


कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है कि, बीजेपी सरकार ने एक बार फिर मुकेश अंबानी और नीता अंबानी को फायदा पहुंचाया है। जियो इंस्टीट्यूट जो अस्तित्व में ही नहीं है, उसे 'इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस' का दर्जा दिया गया है। सरकार को सफाई देना चाहिए इस तरह का दर्जा देने का क्या पैमाना है।

असम के पूर्व सीएम तरुण गोगाई ने ट्वीट किया है कि, बीजेपी सरकार की तरफ से IIT's और IISC के साथ Jio इंस्टीट्यूट को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा दिया जाना हास्यास्पद है। रिलायंस फाउंडेशन का Jio इंस्टीट्यूट अभी अस्तित्व में नहीं है। यह दिखाता है कि मोदी सरकार लगातार अपने कॉरपोरेट को दोस्त मदद पहुंचा रही है।


वहीं एचआरडी मंत्रालय ने सफाई दी है कि, यूजीसी रेगुलेशन 2017 के क्लॉज 6.1 के अनुसार इस प्रोजेक्ट में बिल्कुल नए संस्थानों को भी शामिल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स को इंटरनेशनल लेवल के एजुकेशन इंफास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए बढ़ावा देना है, जिससे पूरे देश को इसका फायदा मिल सके।

मंत्रालय ने कहा जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड कैटेगरी के तहत चुना गया है, जो नए संस्थानों के लिए होती है। मंत्रालय के मुताबिक इसके लिए चार मानक तय किए गए थे। जिसमें इंस्टीट्यूट बनाने के लिए जमीन उपलब्ध हो, शीर्ष योग्यता और व्यापक अनुभव वाली टीम रख रहे हों, इंस्टीट्यूट स्थापित करने के लिए फंड जुटा सकें, ये मानक शामिल हैं। 


 
उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा दिये जाने के मौके पर एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि यह काफी महत्वपूर्ण है। हमारे देश में 800 यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन एक भी यूनिवर्सिटी शीर्ष 100 या 200 की विश्व रैंकिंग में शामिल नहीं है।

हमारे इस फैसले से इसे हासिल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि, इससे इन संस्थानों के लेवल और क्वालिटी को तेजी से बेहतर बनाया जा सकेगा। इसके अलावा विश्व स्तरीय संस्थान बनाने की दिशा में जो कुछ भी जरूरी होगा वो सब किया जा सकेगा।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।