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कपिल सिब्बल ने एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व पर उठाए सवाल

November 16th, 2020 20:31 IST
 कपिल सिब्बल ने एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व पर उठाए सवाल

हाईलाइट

  • कपिल सिब्बल ने एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 16 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव के साथ अन्य कई राज्यों के उपचुनावों में कांग्रेस की करारी शिकस्त ने एक बार फिर पार्टी के अंदर के रोष को बाहर ला दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने फिर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।

इससे पहले सिब्बल उन 23 नेताओं में से एक थे, जिन्होंने पत्र लिखकर पार्टी में व्यापक सुधार लाने की मांग की थी।

सिब्बल ने कहा कि वह सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि पार्टी के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पार्टी में कोई मंच नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनावों का प्रबंधन करने के लिए कुशल और वरिष्ठ नेताओं की जरूरत है।

बिहार विधानसभा और विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सिब्बल का यह बयान सामने आया है, जिसे टीम राहुल गांधी पर एक स्पष्ट हमले के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी चुनावी टीम चुनाव प्रक्रिया में शामिल थी।

उन्होंने यह भी नाखुशी व्यक्त की कि पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने बिहार के नतीजों पर बात नहीं की है।

कई कांग्रेस नेताओं ने बिहार के नतीजों के बाद अपनी बात रखी है, क्योंकि कांग्रेस को विपक्ष के महागठबंधन में सबसे कमजोर कड़ी के रूप में पाया गया है। कांग्रेस ने राज्य में 70 सीटों पर चुनाव लड़ा, मगर वह महज 19 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी। कांग्रेस उन उपचुनावों में भी हार गई, जहां उसका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सीधा मुकाबला था।

सिब्बल ने कहा कि पार्टी को स्वीकार करना होगा कि वह ढलान पर है और संगठनात्मक पुनर्गठन और मीडिया प्रबंधन से लेकर खुद को मजबूत करने के लिए कई तरीकों को अपनाए जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनकी पार्टी को विचारशील नेतृत्व की आवश्यकता है जो अधिक मुखर हो और चीजों को आगे बढ़ा सके। कांग्रेस नेता ने कहा, पार्टी के पास चर्चा के लिए अधिक अनुभवी लोग हैं, (वे) जो राजनीतिक स्थिति को समझ सकते हैं और लोगों तक पहुंच स्थापित कर सकते हैं।

मालूम हो कि कपिल सिब्बल सहित 22 कांग्रेसी नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर व्यापक स्तर पर पार्टी में सुधारों की मांग की थी।

एकेके/एसजीके

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