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19 साल पहले आज ही के दिन पाकिस्तान ने टेके थे भारत के सामने घुटने

July 26th, 2018 23:34 IST
19 साल पहले आज ही के दिन पाकिस्तान ने टेके थे भारत के सामने घुटने

हाईलाइट

  • 26 जुलाई का दिन भारतीय कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना को धूल चटाई थी।
  • इस दौरान अपनी वीरता का परिचय देते हुए कई भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 26 जुलाई 1999 वो दिन, जब भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। 3 मई 1999 को पाकिस्तानी सेना ने हमला करते हुए कारगिल युद्ध की शुरुआत की थी, मगर इसकी समाप्ति भारतीय सेना ने जीत के साथ 26 जुलाई 1999 को की थी। करीब दो महीने तक चलने वाले इस युद्ध में जीत मिलने के साथ ही दुनिया को भारत की ताकत का सबूत भी देखने को मिला।


इस युद्ध में भारतीय सेना के बहादुर जवानों ने सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों को गोलियों से छलनी कर दिया था। इस युद्ध में कई पाकिस्तानी सैनिक ऐसे भी थे, जो दुम दबाकर भागते नजर आए। हालांकि इस दौरान अपनी वीरता का परिचय देते हुए कई भारतीय सैनिक शहीद भी हुए थे। वीर सैनिकों में लांस नायक शहीद आबिद खान, कैप्टन विक्रम बत्रा, संजय कुमार, कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय, कैप्टन अनुज नायर आदि शामिल थे।


कहते हैं यह युद्ध भारत के लिए जीतना काफी मुश्किल नजर आ रहा था, क्योंकि सीमा पर स्थित लगभग सभी ऊपरी पोस्टों पर पाकिस्तानी सेना का कब्जा था। इसके बावजूद भारतीय सेना ने पाक आर्मी के सामने झुकने और रुकने से इनकार कर दिया। वीर भारतीय सैनिकों ने शानदार रणनीति बनाते हुए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना शुरू किया। हर तरफ से घेरते हुए भारत ने पाक सेना को झुकने पर मजबूर कर दिया।


चरवाहे ने दी थी जानकारी
पाकिस्तानी सेना ने जब LOC के इस पार भारतीय सीमा में घुसने की नापाक कोशिश की थी, उस दौरान एक चरवाहे ने सबसे पहले उन्हें देखा था। चरवाहे को उनके बंकर नजर आए थे। इसके बाद घुसपैठ की यह जानकारी उसने सबसे पहले भारतीय सेना को दी। खबर मिलते ही सबसे नजदीकी सेना की पोस्ट को इसे जांचने के लिए भेजा गया। 03 मई 1999 को कैप्टन सौरभ कालिया सहित 6 जवान वहां पहुंचे, लेकिन उन्हें पाकिस्तानी सेना ने घेर लिया। इसके बाद सभी के क्षत-विक्षत शव भारतीय सेना को मिले।

पाकिस्तानी सैनिकों ने बेरहमी से टॉर्चर देते हुए कैप्टन सौरभ के कान के पर्दों को गर्म सलाखों से दागा था। उनकी आंखें फोड़ दी गईं। शरीर के कई अंग काट दिए गए थे और हड्डियां तोड़ दी गईं। इस अमानवीय घटना के बाद करगिल का युद्ध शुरू हो गया। जिसका अंत भारतीय सेना ने 26 जुलाई 1999 को जीत के साथ किया था।

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