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केरल बाढ़: यूएई के 700 करोड़ लेने से विनम्रतापूर्वक इनकार करेगा भारत

August 22nd, 2018 14:33 IST
केरल बाढ़: यूएई के 700 करोड़ लेने से विनम्रतापूर्वक इनकार करेगा भारत

हाईलाइट

  • बारिश से आई बाढ़ का कहर झेल रहे केरल की मदद करने कई देश आगे आ रहे हैं।
  • यूएई ने बाढ़ प्रभावितों के लिए 700 करोड़ देने का ऑफर दिया था।
  • पिछले 15 सालों के दौरान आई आपदाओं से सरकार खुद ही निपटती है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बारिश से आई बाढ़ का कहर झेल रहे केरल की मदद करने कई देश आगे आ रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार विदेशी मदद के प्रस्तावों से विनम्रता के साथ इनकार कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने केरल सरकार से भी कहा है कि विदेशों से आ रहे सहायता के प्रस्ताव को स्वीकार करने से विनम्रतापूर्वक मना कर दें। पिछले 15  सालों के दौरान आई आपदाओं से सरकार खुद ही निपटती है। भारत की नीति रही है कि व घरेलू आपदाओं के लिए विदेशी मदद न लेने की कोशिश करता है। इससे पहले मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मदद की पेशकश की थी। यूएई ने बाढ़ प्रभावितों के लिए 700 करोड़ देने का ऑफर दिया था। केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने तिरुअनंतपुरम में कहा था कि अबू धाबी के शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर सहायता की पेशकश की। सीएम विजयन ने केंद्र से 2600 करोड़ की मांग की है, जबकि केंद्र सरकार ने अब तक 600 करोड़ की मदद दी है। 


यूएई में रहते हैं 30 लाख भारतीय
संयुक्त अरब अमीरात में करीब 30 लाख भारतीय रहते हैं, जिसमें 80 फीसदी केरल के हैं। माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र भी केरल बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए पेशकश कर रहा है। मालदीव सरकार ने भी केरल को 35 लाख रुपए देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री राहत कोष में सोमवार तक 210 करोड़ रुपए इकट्ठे हो चुके हैं। इसके अलावा 160 करोड़ रुपए देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। मुख्मयंत्री पी. विजयन की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मनरेगा समेत केंद्र की योजनाओं के तहत विशेष पैकेज मांगने का निर्णय किया है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।