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भाषा प्रतिभा को रोक नहीं रख सकती : यूपीएससी टॉपर

November 22nd, 2020 20:31 IST
 भाषा प्रतिभा को रोक नहीं रख सकती : यूपीएससी टॉपर

हाईलाइट

  • भाषा प्रतिभा को रोक नहीं रख सकती : यूपीएससी टॉपर

नई दिल्ली, 22 नवंबर (आईएएनएस)। सिविल सेवा परीक्षा और हिंदी माध्यम विषय पर एक राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन रविवार को किया गया। वेबिनार में देश भर से बड़ी संख्या में शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और सिविल सेवा अभ्यर्थियों ने सहभागिता की। यह संगोष्ठि भारतीय मनो-नैतिक शिक्षा और संस्कृति को समर्पित संस्थान प्रज्ञानम इंडिका द्वारा आयोजित की गई।

कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रज्ञानम इंडिका के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर निरंजन कुमार ने कहा, देश में सुचारु रूप से व्यवस्था चलाने में संघ लोक सेवा आयोग का महžवपूर्ण योगदान है। लेकिन आयोग पिछले कुछ समय से सवालों के घेरे में है। इसमें प्रश्नों के अनुवाद की भी समस्या शामिल है। इसके अलावा अभ्यर्थियों की आर्थिक, सामाजिक, भौगोलिक पृष्ठभूमि भी अक्सर परीक्षा में पिछड़ने का कारण बनती है जिन पर समग्र रूप से ध्यान देने की जरूरत है।

आईएएस तथा अपनी बैच में यूपीएससी परीक्षा टॉपर डॉ सुनील कुमार बर्णवाल ने कहा, भाषा प्रारंभिक स्तर पर भले एक समस्या बने पर प्रतिभा को वह बहुत समय तक रोके नहीं रख सकती है। इसलिए अभ्यर्थियों को अन्य बातों पर ध्यान दिए बिना अपने पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भारतीय भाषाएं हमारी संस्कृति से जुड़ी है।

आईएएस निशांत जैन ने सिविल सेवा परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं के चयनित अभ्यर्थियों की संख्या पांच प्रतिशत से भी कम होने पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा, हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों में प्रतिभा की कमी नहीं होती, बल्कि वे अपेक्षाकृत सामाजिक रूप से अधिक प्रतिबद्ध होते हैं। सिविल सेवा परीक्षाओं में अकादमिक से जुड़े लोगों की निष्क्रियता और कोचिंग की अति सक्रियता के कारण भी विसंगतियां आई हैं जिसे दूर करने की जरूरत है।

आईएएस विवेक पांडेय ने सिविल सेवा परीक्षा में तमाम समस्याओं से परे अपनी मौलिकता पर जोर देने का आग्रह किया। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा को राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा बताते हुए अपने व्यक्तित्व में विकास पर जोर दिया। उन्होंने परीक्षा में अत्यंत संक्षिप्त और साररूप में उत्तर लेखन की बात भी कही।

जीसीबी/आरएचए

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक का काउंटडाउन शुरु हो चुका हैं। 23 जुलाई से शुरु होने जा रहे एथलेटिक्स त्यौहार में भारतीय दल इस बार 120 खिलाड़ियों के साथ 18 खेलों में दावेदारी पेश करेगा। बता दें 81 खिलाड़ियों के लिए यह पहला ओलंपिक होगा। 120 सदस्यों के इस दल में मात्र दो ही खिलाड़ी ओलंपिक पदक विजेता हैं। पी.वी सिंधू ने 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर तो वहीं मैराकॉम ने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।

भारत पहली बार फेंनसिग में चुनौता पेश करेगा। चेन्नई की भवानी देवी पदक की दावेदारी पेश करेंगी। भारत 20 साल के बाद घुड़सवारी में वापसी कर रहा है, बेंगलुरु के फवाद मिर्जा तीसरे ऐसे घुड़सवार हैं जो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। 

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युवा कंधो पर दारोमदार

टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने जा रहे भारतीय दल में अधिकतर खिलाड़ी युवा हैं। 120 खिलाड़ियों में से 103 खिलाड़ी 30 से भी कम आयु के हैं। मात्र 17 खिलाड़ी ही 30 से ज्यादा उम्र के होंगे। 

भारतीय दल में 18-25 के बीच 55, 26-30 के बीच 48, 31-35 के बीच 10 तो वहीं 35+ उम्र के 7 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इस लिस्ट में सबसे युवा 18 साल के दिव्यांश सिंह पंवार हैं, जो शूटिंग में चुनौता पेश करेंगे, तो वहीं सबसे उम्रदराज 45 साल के मेराज अहमद खान होंगे जो शूटिंग में ही पदक के लिए भी दावेदार हैं।