comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

गांधी विचार के प्रति छात्रों का आकर्षण कम !

गांधी विचार के प्रति छात्रों का आकर्षण कम !

भागलपुर (बिहार), 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश ही नहीं, पूरी दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले महात्मा गांधी के विचारों को युवाओं के बीच पहुंचाने के लिए स्थापित बिहार के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में गांधी विचार विभाग के प्रति छात्रों का आकर्षण अब होता जा रहा है।

कहा जाता है कि कभी इस विभाग की कक्षाएं विद्यार्थियों से भरी होती थीं, लेकिन अब कक्षाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति नाम मात्र की होती है। छात्र इसका करण इस विषय का रोजगारोन्मुख न होना बता रहे हैं।

तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग की परिकल्पना राष्ट्रकवि रामधारी सिंह की दिनकर ने उन दिनों की थी, जब वह इस विश्वविद्यालय के कुलपति थे। उनकी परिकल्पना को प्रख्यात गांधीवादी प्रो.रामजी सिंह ने अपने प्रयासों से साकार किया था और इस विभाग की शुरुआत 2 अक्टूबर, 1980 में की गई थी।

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि गांधी विचार विभाग से 3000 छात्र-छात्राओं ने एमए, 100 से अधिक छात्रों ने पीएचडी, 80 छात्रों ने नेट, 85 छात्रों ने बेट तथा 15 छात्रों ने यूजीसी -जेआरएफ में सफलता हासिल की है। लेकिन अब इस विभाग पर अस्तित्व का संकट आ गया है।

गांधी विचार विषय के स्नातकोत्तर (एमए) में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में पिछले कुछ वर्षो में गिरावट आई है। छात्रों को इस पाठ्यक्रम की पढ़ाई से रोजगार के अवसर उपलब्ध होने में संदेह है। दाखिला पंजी में शैक्षणिक सत्र (2019-20) के पहले सेमेस्टर में मात्र 18 छात्रों के नाम दर्ज हैं।

इसके अलावा, चौथे सेमेस्टर में मात्र आठ छात्र हैं, जो अंतिम परीक्षा में उपस्थित हुए थे और परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तीसरे सेमेस्टर में तीन और दूसरे सेमेस्टर में मात्र 32 छात्रों का नामांकन है।

मधेपुरा स्थित बी़ एऩ मंडल विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी सुधांशु शेखर कहते हैं, आजादी के आंदोलन से 1974 के जेपी आंदोलन का सफर तय किए प्रो़ रामजी सिंह अपने समर्पण और गांधीवादी मूल्यों को आत्मसात कर इस विभाग को काफी ऊंचाई तक ले गए। बाद के दिनों में इसमें गिरावट दिखा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सत्र में कम नामांकन होने के बाद इस विभाग को बंद करने की चेतावनी दी थी, हालांकि ऐसा हुआ नहीं। वैसे, यह सत्य है कि यहां पढ़ाई कर चुके कुछ चुनिंदा लोगों ने ऊंचे पदों पर नौकरी पाई है, जबकि अधिकांश छात्रों ने स्वरोजगार को अपनाया है।

यहां छात्र रहे सूजागंज के सुनील अग्रवाल भागलपुर में इलेक्ट्रिक सामान की दुकान चला रहे हैं, जबकि अमरजीत एक वित्तरहित कॉलेज में कार्यरत हैं।

यहां छात्र रहे पत्रकार प्रसून लतांत कहते हैं, गांधी के शिक्षा दर्शन को आत्मसात कर यदि युवाओं को उनके विचारों से लैस किया जाए तो परिणाम बेहतर होगा, लेकिन यदि लक्ष्य सिर्फ नौकरी तक सीमित रहेगा तो परिणाम निराशाजनक होगा।

उन्होंने बताया कि बिहार के शिक्षा मंत्री रहे वृषिण पटेल ने घोषणा की थी कि राज्य के बुनियादी स्कूलों में गांधी विचार की पढ़ाई कर चुके छात्रों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। यह सिर्फ राजनीतिक आश्वासन बनकर रह गया।

विभागाध्यक्ष विजय कुमार ने आईएएनएस से कहा कि स्थिति में परिवर्तन हो रहा है, नियम कड़े किए गए हैं। पात्रता देखकर नामांकन लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, गांधीवादी विचारों से संबंधित योजनाओं को लागू करने में मदद करने के लिए इसे एक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है और इसे कौशल विकास आदि कार्यक्रमों को जोड़ा जा सकता है। विश्वविद्यालय ने साल 2004 में पांच कॉलेजों में स्नातक स्तर पर गांधी विचार को विषय के रूप में पेश करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अभी तक उस पहलू पर कुछ नहीं किया गया है।

बहरहाल, सच तो यह है कि गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की कवायद में जुटने का दावा करने वाली बिहार सरकार इस कार्य में पहले से जुटे विश्वविद्यालय के एक विभाग की सुध नहीं ले पा रही है।

कमेंट करें
w5ZiM
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।