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गरमागरम बहस के बीच UAPA बिल पास, गृहमंत्री शाह बोले...आतंकियों से निपटने उठा रहे कठोर कदम

गरमागरम बहस के बीच UAPA बिल पास, गृहमंत्री शाह बोले...आतंकियों से निपटने उठा रहे कठोर कदम

हाईलाइट

  • गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन विधेयक लोकसभा में पास
  • गृहमंत्री अमित शाह बोले, कांग्रेस ने बनाया था कानून

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक बुधवार को लोकसभा में गरमागरम बहस के बाद पारित किया गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आतंकवाद को समाप्त करने के लिए कड़े कानूनों की आवश्यकता थी और संशोधन राज्यों की शक्तियों का अतिक्रमण नहीं करता है। लोकसभा में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 पर किए गए सवाल का जवाब देते हुए, शाह ने कहा कि भाजपा नीत सरकार अपने प्रावधानों का कभी दुरुपयोग नहीं करेगी।

कांग्रेस और कई विपक्षी दलों ने मंत्री के जवाब के बाद वॉकआउट कर दिया और कहा कि विधेयक को एक स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए। शाह ने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने केवल उस कानूनों में संशोधन किया, जो कांग्रेस द्वारा लागू किए गए, जिसके प्रावधानों को बाद में कठोर बना दिया गया था।

शाह ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने जो किया "वह सही था और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार भी सही कर रही है"। यह कानून 1967 में कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किया गया था और 2004, 2008 और 2013 में इसमें संशोधन किए गए थे, जब कांग्रेस सत्ता में थी। उन्होंने कहा कि किसने कानून को कठोर बनाया? आपने जो किया वह सही था, हम जो कर रहे हैं वह भी सही है। 

उन्होंने विपक्षी सदस्यों से उनकी चिंताओं के बारे में पूछा, शाह ने कहा कि  कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पूछा था कि सख्त कानूनों की क्या जरूरत है और राजनीतिक संवाद के जरिए आतंक से जुड़ी समस्याओं का हल किया जाना चाहिए, जिसके जवाब में शाह ने विधेयक के उन प्रावधानों का उल्लेख किया, जो एक व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में नामित करने की अनुमति देते हैं, उन्होंने कहा कि यदि प्रतिबंध लगाया जाता है तो आतंकवादी अक्सर नए संगठनों को तैयार कर लेते हैं।

शाह ने यह भी कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार "शहरी माओवाद" के खिलाफ है। गृह मंत्री ने कहा, "इस देश में, सामाजिक कार्यों में बहुत सारे लोग सम्मानपूर्वक काम कर रहे हैं, पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए इच्छुक नहीं है, लेकिन शहरी माओवाद के लिए काम करने वालों के लिए हमारे पास कोई सहानुभूति नहीं है।" "हमारे पास उन लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है जो एक वैचारिक ढाल के तहत माओवाद को बढ़ावा देते हैं।

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inderpal singh bhatia July 27th, 2019 15:39 IST

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