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भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू, पुरी और अहमदाबाद में उमड़ा जनसैलाब

July 14th, 2018 19:45 IST
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू, पुरी और अहमदाबाद में उमड़ा जनसैलाब

हाईलाइट

  • अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 141 वीं रथयात्रा रवाना।
  • मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने झाडू निकालकर रथ को खींच कर रथयात्रा की शुरूआत की।
  • मंगला आरती के लिए अमहादाबाद पहुंचे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह।

डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू हुई। भगवान जगन्नाथ, बलभ्रद और देवी सुभद्रा को गर्भगृह से बाहर लाकर रथ में बनाए गए सिंहासन पर विराजमान किया गया है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा नगर भ्रमण के लिए रवाना हो चुकी है। इससे पहले भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई और विशेष श्रृंगार किया गया। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पुरी और गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 141 वीं भव्य रथयात्रा निकाली जा रही है। अहमदाबाद में  मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सोने की झाडू से रथ के सामने सफाई की उसके बाद रथ को खींच कर यात्रा को रवाना किया। 


लाखों श्रद्धालुओं के बीच बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रथयात्रा से पहले अहमदाबाद में मंगला आरती में शामिल हुए। ओडिशा के पुरी में भी रथयात्रा शुरू होने का इंतजार है। भगवान जगन्नाथ का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। भगवान जगन्नाथ का रथ पीले और लाल रंग के कपड़ो से बना है, जिसमें 16 पहिए लगे हैं। सुभद्रा जी का रथ काले और लाल रंग के कपड़ो का बना है। जिसमें 12 पहिए लगे है। बलभद्र भगवान का रथ हरे और लाल रंग से सजाया गया है, इसमें 14 पहिए लगाए गए है। अहमदाबाद में रथयात्रा भगवान जगन्नाथ के मुख्य मंदिर से सरसपुर के रणछोड़दास मंदिर तक जाएगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ यहां करीब दो घंटे रुकेंगे। सरसपुर के रणछोड़दास मंदिर को भगवान जगन्नाथ का ननिहाल कहा जाता है। अहमदाबाद में मंत्रोच्चार के साथ मंगला आरती के पहले भगवान जगन्नाथ का भव्य स्नान और अभिषेक किया गया।  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो जारी भगवान जगन्नाथ की यात्रा को लेकर सभी देशवासियों को शुभकमानाएं दी 

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मंगला आरती में शामिल हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 

सुरक्षा व्यवस्था की बीच रथयात्रा
अहमदाबाद में रथयात्रा के 15 किमी लम्बे रूट पर पहली बार इजराइली हीलियम बैलून लगाए गए हैं। हाईडेफिनेशन कैमेरों की मदद से यात्रा पर निगरानी रखी जा रही है। अहमदाबाद की रथयात्रा में सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम हैं। गुजरात पुलिस के 14 हजार से ज्यादा जवान, स्टेट रिजर्व पुलिस की 22 कंपनियां और अर्धसैनिक बलों की 25 कंपनियां तैनात हैं।  भगवान की इस रथयात्रा में करीबन 2500 साधुसंत शामिल है।  इस रथयात्रा की सुरक्षा के लिए 1.5 करोड़ रुपये का बीमा भी लिया गया है। रथयात्रा के दौरान अगर कोई बड़ी जानहानि होती हे तो उसके लिए ये बीमा सुरक्षा रहेगा।

रथयात्रा का इतिहास 
उड़ीसा के पूरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर दुनिया में प्रसिद् है। सनातन धर्म में इसे चार धामों में से एक कहा गया। जगन्नाथ पूरी में भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण का मंदिर है। यहां हर साल भगवान कृष्ण उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा को रथों में बैठाकर गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है। तीनों रथों को भव्य रूप से सजाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा अपने मायके आती है, और अपने भाइयों से नगर भ्रमण करने की इच्छा व्यक्त करती है, तब कृष्ण और बलराम सुभद्रा के साथ रथ में सवार होकर नगर घुमने जाते है, इसके बाद से रथ यात्रा का पर्व शुरू हुआ है। इसके अलावा कहते है, कि गुंडीचा मंदिर में स्थित देवी कृष्ण की मासी है, जो तीनों को अपने घर आने का निमंत्रण देती है। श्रीकृष्ण, बलराम सुभद्रा के साथ अपनी मासी के घर 10 दिन के लिए रहने जाते है। 

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भगवान कृष्ण का रूप है जगन्नाथ
उड़ीसा के पुरी के बाद भगवानविष्णु के अवतार भगवान कृष्ण को ही जगन्नाथ यानी जगत के पालनहार कहा जाता है। गुजरात में भारी तादाद में भगवान कृष्ण के अनुयायी हैं। गुजरात के द्वारका में भगवान कृष्ण की राजधानी की मान्यता है।

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यात्रा में आकर्षण का केन्द्र 
भगवान जगन्नाथ की यात्रा के लिए तीनों रथों को बेहद खूबसूरत ढंग से तैयार किया गया है। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आने वाले लोगों को 30 हजार किलो भीगे हुए मूंग, 500 किलो जामुन, 300 किलो आम और 400 किलो ककड़ी दी जाएगी। रथयात्रा की शुरुआत में सबसे आगे 18 गजराज, 101 ट्रक, 30 अखाड़े जो कि अलग-अलग करतब दिखाएंगे। 18 भजन मंडली और तीन बैंड बाजे के साथ निकलेगी। रथयात्रा का समापन शाम के वक्त करीबन 7 बजे रथ की मंदिर में वापसी के साथ होगा।

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फ्रांस की राजधानी पेरिस में भगवान जगन्नाथ यात्रा की कुछ तस्वीरें 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।