दैनिक भास्कर हिंदी: Coronavirus: गुजरात से वापस लाए गए MP के 2400 मजदूर, शिवराज बोले- जांच के बाद भेजे जाएंगे गांव

April 26th, 2020

हाईलाइट

  • अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को वापस लाने में जुटी शिवराज सरकार
  • शनिवार को 98 बसों से 2400 प्रवासी मजदूर गुजरात से वापस मप्र लाए गए

डिजिटल डेस्क, भोपाल। कोरोना से निपटने के लिए देश में जारी लॉकडाउन (Lockdown) के कारण अन्य राज्‍यों में फंसे प्रवासी मजदूर (migrant workers) अपने घर वापस लौटने की कोशिश में लगे हुए हैं। ऐसे में राज्य सरकारें मजदूरों की मदद के लिए आगे आ रही हैं। यूपी के बाद अब एमपी की शिवराज सरकार (MP government) राज्य के प्रवासी मजदूरों को वापस लाने में जुट गई है। सरकार के इसी कदम के चलते गुजरात में फंसे मध्य प्रदेश के करीब 2400 प्रवासी मजदूरों की 98 बसों से शनिवार रात को प्रदेश में वापसी हुई।

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जांच के बाद ही घर भेजे जाएंगे मजदूर
गुजरात से लौट रहे 2400 मजदूर शनिवार देर रात झाबुआ पहुंचे। यहां सबकी थर्मल स्‍क्रीनिंग की गई। जांच के बाद मजदूरों को उनके गांव पहुंचाया जाएगा। मजदूरों की वापसी पर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने कहा, देश के अलग अलग राज्यों में फंसे मध्य प्रदेश के मजदूरों को उनके गांव भेजा जाएगा। इसके लिए वाहनों की व्‍यवस्‍था की गई है, लेकिन जांच के बाद ही सभी को उनके घर भेजा जाएगा।

लॉकडाउन के दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा
शिवराज सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों की वापसी के लिए योजना बनाई है। इसके तहत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान आदि राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात भी की। मुख्यमंत्री ने बताया कि, प्रदेश में ही अन्य जिलों में फंसे मजदूरों को भी बसों से उनके गृह जिलों व गांवों में लाने का कार्य किया जा रहा है। यह क्रम निरंतर जारी रहेगा। मजदूर धैर्य रखें, सभी को लाए जाने की व्यवस्था की जाएगी। मजदूरों को पैदल नहीं चलने देंगे, परेशान नहीं होने देंगे।  हालांकि मुख्‍यमंत्री ने ये भी कहा कि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लॉकडाउन के दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा। प्रदेश की सीमा में पहुंचने वाले प्रवासी मजदूरों की जांच की जाएगी। 

होम क्वारेंटाइन में रखा जाएगा
सीएम शिवराज ने बताया, सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य परीक्षण करवाया जाएगा तथा उन्हें होम क्वारेंटाइन में रखा जाएगा। आवश्यकता होने पर उन्हें गांव के बाहर एक केन्द्र में भी रखा जा सकता है। इस कार्य में लोग को भी प्रशासन की मदद करना होगी, वहीं बाहर से लौटने वाले साथी मजदूर वर्ग का सहयोग करें और पूर्ण मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाएं।

मुख्यमंत्री ने बताया, कई परिवारों के बच्चे अन्य राज्यों और अन्य जिलों में हैं, मां-बाप उन्हें वापस बुलाना चाहते हैं। हम उनके लिए भी ई-पास की व्यवस्था कर रहे हैं। ये बच्चे अपने साधनों से अपने घर लौट सकेंगे, परन्तु इंदौर, भोपाल, उज्जैन जैसे संक्रमित जिलों से कोई आएगा-जाएगा नहीं।

 

 

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