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महाराष्ट्र: सीटों का ये समीकरण फिर लेगा नया ट्विस्ट ! क्या भाजपा होगी परेशान ?

महाराष्ट्र: सीटों का ये समीकरण फिर लेगा नया ट्विस्ट ! क्या भाजपा होगी परेशान ?

हाईलाइट

  • शरद पवार का दावा, गठबंधन को करीब 170 विधायकों को समर्थन
  • दावा सही साबित हुआ, तो बढ़ सकती है भाजपा की परेशानी
  • कांग्रेस, शिवसेना और NCP रख रही पार्टी विधायकों पर नजर

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में अचानक बदले सियासी समीकरणों ने प्रदेश में हलचल बढ़ा दी है। जहां शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) मिलकर सरकार बनाने की तैयारी कर रही थी, वहीं शनिवार सुबह भाजपा ने बिना किसी भनक के NCP से अजित पवार की बगावत के चलते अपनी सरकार बना ली। अब प्रदेश में बनी नई सरकार के गठन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा गया है। वहीं फडणवीस के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ लेने के बाद विधायकों के दल-बदल को लेकर शिवसेना, कांग्रेस और NCP में अफरातफरी मच गई। एक तरफ NCP ने अपने विधायकों को खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए मुंबई के एक होटल में बंद कर लिया, तो वहीं कांग्रेस द्वारा भी प्रदेश पार्टी विधायकों को जयपुर भेज दिया गया।

क्या है सीटों का समीकरण

महाराष्ट्र में शनिवार को चले राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भी NCP अध्यक्ष शरद पवार अब भी दावा कर रहे है कि उनका गठबंधन ही सरकार बनाएगा। पवार का कहना है कि NCP, कांग्रेस और शिवसेना के गठन को 156 विधायक अपना समर्थन दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया है कि  उनके पास विधानसभा में जीते निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है। यदि शरद पवार का यह दावा मान लिया जाए, तो तीनों दलों का यह गठन करीब 170 विधायक हासिल कर लेगा, जबकि सरकार बनाने के लिए कम से कम 145 सीटों का बहुमत साबित करना है।

इस स्थिति में शिवसेना, NCP और कांग्रेस का सिरदर्द कम होगा। वहीं इसके साथ ही भाजपा में परेशानी बढ़ सकती है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने 56, NCP ने 54 और कांग्रेस ने 44 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। बहरहाल भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने के डर से तीनों दल अपने विधायकों पर नजर बनाए रखे है।

23 नवंबर इतिहास का काला दिन : कांग्रेस

शनिवार को महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने बीते दिन को भारत के लोकतंत्र और प्रदेश के इतिहास का काला दिन बताया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा था कि 'बैंड, बाजा और बारात के बिना मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।' उन्होंने कहा कि 'महाराष्ट्र के इतिहास में यह घटना काली स्याही से लिखी जाएगी।' वहीं पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी कहा था कि 'देश के लोकतंत्र और महाराष्ट्र के इतिहास में 23 नवंबर की तारीख काले दिन के रूप में दर्ज की जाएगी।'

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।