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किसानों को मोदी सरकार का दिवाली गिफ्ट, रबी की फसलों पर बढ़ाया समर्थन मूल्य 

किसानों को मोदी सरकार का दिवाली गिफ्ट, रबी की फसलों पर बढ़ाया समर्थन मूल्य 

हाईलाइट

  • 85 रुपए बढ़कर 1,925 रुपए प्रति क्विंटल हो किया
  • मसूर का एमएसपी 325 रुपए बढ़ाकर 4,800 रुपए प्रति क्विंटल किया
  • तिलहन के मामले में रेपसीड/सरसों का एमएसपी 4,425 रुपए प्रति क्विंटल किया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मोदी सरकार ने दिवाली से पहले देश के किसानों को बड़ा गिफ्ट दिया है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में केंन्द्र सरकार ने रबी की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने के फैसले पर मुहर लगा दी है। इसके तहत प्रमुख फसल गेहूं का एमएसपी 85 रुपए बढ़कर 1,925 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। इससे पहले यह 1,840 रुपए था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रीमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीएआई) की बैठक में यह फैसला लिया गया। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर, रविशंकर प्रसाद और हरदीप सिंह पुरी ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।

रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि की सिफारिश सीएसीपी यानी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक से किसानों को काफी उम्मीदें थीं।

बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि किसानों की आय बढ़ाने की पहल के तहत मंत्रिमंडल ने चालू वर्ष के लिए रबी फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाने का फैसला किया है। सीसीईए ने 2019-20 के लिए गेहूं का एमएसपी 85 रुपये क्विंटल बढ़ाकर 1,925 रुपए प्रति क्विंटल किया है। पिछले साल यह 1,840 रुपए प्रति क्विंटल था।

25 रुपए बढ़ाया मसूर का एमएसपी 

चालू फसल वर्ष के लिए जौ का एमएसपी भी 85 रुपए बढ़ाकर 1,525 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है जो कि पिछले साल 1,440 रुपए प्रति क्विंटल था। दाल की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मसूर का एमएसपी 325 रुपए बढ़ाकर 4,800 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया, जो पिछले साल 4,475 रुपए प्रति क्विंटल था।

चना, सरसों की फसलों को भी मिलेंगे अधिक दाम

बैठक में चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 255 रुपए बढ़ाकर 4,875 रुपए प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया गया। इससे पिछले साल यह 4,620 रुपए प्रति क्विंटल था। तिलहन के मामले में रेपसीड/सरसों का एमएसपी 2019-20 के लिए 225 रुपए बढ़ाकर 4,425 रुपए प्रति क्विंटल किया गया। फसल वर्ष 2018-19 में यह 4,200 रुपए प्रति क्विंटल था। सनफ्लॉवर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 270 रुपए बढ़ाकर 5,215 रुपए क्विंटल किया गया है। इससे पिछले साल इसका एमएसपी 4,945 रुपए क्विंटल था।

कौन सी हैं रबी की फसलें

रबी फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में की गई सिफारिशों के अनुरूप है। रबी मौसम की फसलों में गेहूं, चना, सरसों मुख्य फसल होती है। इनका विपणन अप्रैल के बाद होता है। वहीं एमएसपी वह दर है जिस मूल्य पर सरकार किसानों को मूल्य समर्थन देते हुय उनसे अनाज खरीदती है। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।