दैनिक भास्कर हिंदी: हंगामेदार हो सकता है मानसून सत्र, महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस

September 6th, 2018

हाईलाइट

  • संसद के मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष
  • बुधवार से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र
  • आतंकवाद, आरक्षण, महिला सुरक्षा, महंगाई जैसे कई मुद्दो पर घिरेगी सरकार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद में विपक्ष इस बार सरकार को आतंकवाद, दलित उत्पीड़न, महंगाई और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रहा है। बुधवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। इस सत्र की भी पिछले बजट सत्र की तरह हंगामेदार रहने की संभावना है। इस सत्र में कांग्रेस सबसे ज्यादा महिला आरक्षण के मुद्दे को उठा सकती है। कांग्रेस ने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी थी।

सरकार ने मांग सहयोग
मानसून सत्र में हंगामे की आशंका के चलते सरकार ने विपक्षी दलों से बलात्कार के दोषियों को सख्त दंड के प्रावधान वाले विधेयक, तीन तलाक विधेयक, पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने संबंधी विधेयक पारित करने में सहयोग मांगा है।

उठ सकते हैं ये मुद्दे
पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि, डालर के मुकाबले रुपए की दर में गिरावट, राम मंदिर, किसान-दलित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को इस बार विपक्ष उठा सकता है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में पीडीपी-भाजपा सरकार गिरने एवं आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी हंगामा होने के आसार हैं।

विपक्ष और एनडीए की बैठकें जारी
मानसून सत्र से पहले मंगलवार को सबसे पहले सरकार और विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक होगी, जिसमें दोनों सदनों के पार्टी नेता मौजूद रहेंगे। शाम चार बजे एनडीए के दलों क बैठक होगी। एनडीए की बैठक से पहले भाजपा की संसदीय कार्यकारी समिति की भी बैठक होगी।

रात्रिभोज में मोदी हो सकते हैं शामिल
लोकसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार स्पीकर सत्र के सुचारू रूप से चलने और लंबित विधेयकों को पारित कराने के लिए दलों से सहयोग मांगेंगी। रात्रिभोज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी उम्मीद है।

13 पार्टियों की बैठक ले चुके हैं आजाद
इसके पहले मंगलवार (16 जुलाई) को बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने की। इस बैठक में विपक्ष के प्रमुख दलों के कई नेता शामिल हुए, जिसमें राज्यसभा के उपाध्यक्ष पद के चुनाव समेत मानसून सत्र की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह एक कन्वेंशनल मीटिंग थी। सभी 13 पार्टियों ने फैसला किया है कि संसद का मानसून सत्र इस बार सुचारू रूप से चलना चाहिए। पिछली बार भी हम यही चाहते थे, लेकिन खुद केंद्र सरकार ने संसद नहीं चलने दी और इसके लिए उल्टे हम पर अवरोध पैदा करने के आरोप लगाए गए।