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SC ने खारिज की दोषियों की पुनर्विचार याचिका, फांसी की सजा बरकरार

July 09th, 2018 23:46 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। गैंगरेप के चार में से तीन दोषियों की तरफ से दायर की गई पुनर्विचार याचिका को SC ने खारिज कर दिया है। मतलब तीनों दोषियों मुकेश, पवन और विनय की फांसी की सजा बरकरार रहेगी। कोर्ट ने पिछले साल 5 मई को निर्भया गैंगरेप और मर्डर के चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसके बाद दोषियों ने SC में रिव्यू पिटिशन (पुनर्विचार याचिका) दाखिल की थी। 

माता-पिता बोले, उम्मीद है इंसाफ मिलेगा


सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच, दोषी पवन गुप्ता (22), मुकेश (29), और विनय शर्मा (23) की याचिकाओं पर फैसला सुनाया। निर्भया कांड के चार दोषियों में शामिल अक्षय कुमार सिंह (31) ने SC के मई 2017 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा कि हमें मालूम था कि रिव्यू पिटिशन खारिज हो जाएगी, लेकिन अब आगे क्या ? वहीं निर्भया की मां आशादेवी ने कहा कि इस फैसले से ये उम्मीद जागी है कि हमें इंसाफ जरूर मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को रखा था बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2017 के फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा था। गैंगरेप और मर्डर के मामले में दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान दोषियों की तरफ से कहा गया था कि, ये मामला फांसी की सजा का नहीं है। वो आदतन अपराधी नहीं हैं, इसलिए उन्हें सुधरने का मौका दिया जाए।

चलती बस में की गई थी दरिंदगी

16 दिसंबर 2012 को 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा निर्भया के साथ साउथ दिल्ली में चलती बस में 6 लोगों ने गैंगरेप किया था। उसे गंभीर चोट पहुंचाने के बाद सड़क पर फेंक दिया था। जिसके बाद सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के दौरान 29 दिसंबर 2012 को निर्भया की मौत हो गई थी। वहीं गैंगरेप के एक दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल था, जिसे तीन साल तक सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया था।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।