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मन की बात: PM मोदी बोले- अराजकता और अव्यवस्था से चिढ़ते हैं देश के युवा

मन की बात: PM मोदी बोले- अराजकता और अव्यवस्था से चिढ़ते हैं देश के युवा

हाईलाइट

  • PM मोदी ने 60वें और 2019 के अंतिम 'मन की बात' कार्यक्रम में दिया संबोधन
  • युवाओं को जातिवाद और परिवारवाद जैसी अव्यवस्थाएं पसंद नहीं : PM मोदी
  • 3 अक्टूबर, 2014 को की थी 'मन की बात' की शुरूआत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 60वें और साल 2019 के अंतिम 'मन की बात' कार्यक्रम में देश की जनता को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बताया कि 'भारत के युवा सही व्यवस्था को पसंद करते हैं और सिस्टम को फॉलो करते हैं।' उन्होंने बताया कि 'युवाओं को अव्यवस्था और अराजकता के प्रति चिढ़ है और उन्हें जातिवाद - परिवारवाद जैसी अव्यवस्थाएं पसंद नहीं हैं।'

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 3 अक्टूबर, 2014 को 'मन की बात' कार्यक्रम की शुरूआत की थी। तब से पीएम मोदी इस कार्यक्रम के जरिए देश के विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। अब तक वह देश के कई अभियानों और प्रेरणादायी लोगों व संस्कृति-सभ्यताओं का इस कार्यक्रम में जिक्र कर चुके हैं।

2020 की बधाई दी

पीएम मोदी ने कहा कि 'साल 2019 की विदाई के पल हमारे समाने हैं, अब हम न सिर्फ नए साल में प्रवेश करेंगे, बल्कि 21वीं सदी के तीसरे और नए दशक में भी जाएंगे।' उन्होंने कहा कि 'मैं सभी देशवासियों को 2020 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। इस दशक के बारे में एक बात निश्चित है कि इसमें देश के विकास को गति देने में वे लोग सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिनका जन्म 21वीं सदी में हुआ है।'

युवाओं के सामर्थ्य से होगा विकास

पीएम मोदी ने कहा कि 'स्वामी विवेकानंद जी कहते थे कि युवावस्था की कीमत को न आंका जा सकता है। ये जीवन का सबसे मूल्यवान कालखंड होता है। आपका जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप अपनी युवावस्था का उपयोग किस प्रकार करते हैं।' उन्होंने कहा कि 'मुझे विश्वास है कि भारत में ये दशक न सिर्फ युवाओं के विकास के लिए होगा बल्कि युवाओं के सामर्थ्य से देश का विकास करने वाला भी साबित होगा। भारत को आधुनिक बनाने में युवा पीढ़ी की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है।'

लोकल प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें

पीएम मोदी ने कहा कि 'मैंने 15 अगस्त को देशवासियों से लोकल प्रोडक्ट्स खरीदने का आग्रह किया था। आज फिर से मेरा सुझाव है कि क्या हम स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्रोत्साहन दे सकते हैं?' उन्होंने बताया कि 'महात्मा गांधी ने स्वदेशी की इस भावना को एक ऐसे दीपक के रूप में देखा जो लाखों के जीवन को रोशन करता हो। गरीब से गरीब के जीवन में समृद्धि लाता हो। 100 साल पहले गांधी जी ने एक बड़ा जन आंदोलन शुरु किया, जिसका लक्ष्य भारतीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना था।'

पीएम मोदी ने लोकल प्रोडक्ट्स पर देशवासियों से सवाल किया कि 'क्या हम संकल्प ले सकते हैं कि 2022 तक जब आजादी के 75 वर्ष पूरे होंगे, इन 2-3 साल हम स्थानीय उत्पाद खरीदने के आग्रही बनें? भारत में बना, जिसमें हमारे देशवासियों के पसीने की महक हो, ऐसी चीजों को खरीदने का हम आग्रह कर सकते हैं क्या?'

स्किल डेवलपमेंट से जुड़ा 'हिमायत'

पीएम मोदी ने कहा कि 'हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि देश के नागरिक आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ अपना जीवन व्यापन करें। मैं एक ऐसी पहल की चर्चा करना चाहूंगा। वो पहल है जम्मू-कश्मीर का 'हिमायत' कार्यक्रम। हिमायत कार्यक्रम स्किल डेवलपमेंट और रोजगार से जुड़ा है।' उन्होंने बताया कि 'इस कार्यक्रम में 15 से 35 वर्ष तक के युवा शामिल हो सकते हैं। ये जम्मू और कश्मीर के वे लोग हैं, जिनकी पढ़ाई किसी कारण पूरी नहीं हो पाई और बीच में ही स्कूल-क़ॉलेज छोड़ना पड़ा।'

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