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प्रसिद्ध गीतकार और कवि गोपालदास नीरज का निधन, एम्स में ली अंतिम सांस

July 20th, 2018 13:45 IST
प्रसिद्ध गीतकार और कवि गोपालदास नीरज का निधन, एम्स में ली अंतिम सांस

हाईलाइट

  • प्रसिद्ध गीतकार और कवि गोपालदास नीरज का 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
  • फेफड़े में संक्रमण की बीमारी से जूझ रहे गोपालदास का आगरा में इलाज चल रहा था।
  • आगरा में बुधवार को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी जगत के प्रसिद्ध गीतकार और कवि गोपालदास नीरज का 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। फेफड़े में संक्रमण की बीमारी से जूझ रहे गोपालदास का आगरा में इलाज चल रहा था। यहां बुधवार को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया। यहां उन्हें ट्रामा सेंटर के आईसीयू में रखा गया था। इलाज के दौरान ही उन्हें सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होने लगी थी। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया है। पीएम ने ट्वीट में लिखा, "प्रसिद्ध कवि और गीतकार श्री गोपालदास 'नीरज' के निधन से दुखी..श्री नीरज की अनूठी शैली ने उन्हें जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से जोड़ा, उनके काम अविस्मरणीय रत्न हैं, जो हमेशा रहेंगे और प्रेरित करेंगे, अपने प्रशंसकों के लिए शोक"।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कवि गोपाल दास नीरज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य जगत के लिए बड़ी हानि बताया। 

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कवि गोपालदास के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि उनके अमर गीत हमेशा-हमेशा हमारी स्मृतियों में गूँजते रहेंगे... कारवाँ गुज़र गया...।


बता दें कि नीरज को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती सम्मान से भी सम्मानित किया था। फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। 1970 में फिल्म चन्दा और बिजली के गीत ‘काल का पहिया घूमे रे भइया!’, 1971 में फिल्म पहचान के गीत ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’ और 1972 में फिल्म मेरा नाम जोकर के गीत ‘ए भाई! जरा देख के चलो’ के लिए उन्हें पुरस्कार मिला है।

कवि गोपालदास नीरज के परिजनों ने बताया कि वे फेफड़े में संक्रमण की बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले कुछ दिनों से उन्हें बार-बार इसी संक्रमण की शिकायत हो रही थी। इसी सोमवार को वे अपनी बेटी से मिलने आगरा पहुंचे थे। नीरज की बेटी कुंदनिका शर्मा आगरा के बल्केश्वर इलाके में रहती हैं। यहां मंगलवार को उनकी सुबह के नाश्ते के बाद तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें दीवानी कचहरी के पास स्थित लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था।

यहां भी इलाज के दौरान उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसके बाद वहां के डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली एम्स में ले जाने की सलाह दी थी। एम्स प्रबंधन ने बताया है कि नीरज को बुधवार रात एम्स ट्रामा सेंटर के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया था। इस दौरान पल्मोनरी और मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने उनका उपचार किया।
 

महाकवि कहे जाने वाले गोपालदास नीरज जी की कुछ प्रसिद्ध रचनाएं....

 

  • प्रसिद्ध गज़ल...

अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई 
मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई 
आप मत पूछिए क्या हम पे सफ़र में गुज़री 
था लुटेरों का जहाँ गाँव वहीं रात हुई 
ज़िंदगी भर तो हुई गुफ़्तुगू ग़ैरों से मगर 
आज तक हम से हमारी न मुलाक़ात हुई 
हर ग़लत मोड़ पे टोका है किसी ने मुझ को 
एक आवाज़ तिरी जब से मिरे साथ हुई 
मैं ने सोचा कि मिरे देश की हालत क्या है 
एक क़ातिल से तभी मेरी मुलाक़ात हुई

  • प्रसिद्ध फिल्मी गीत...

1.
शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब 
उसमें फिर मिलायी जाये, थोड़ी सी शराब, 
होगा यूँ नशा जो तैयार, वो प्यार है
शोखियों में घोला जाये, फूलों का शबाब

2.
कहता है जोकर सारा ज़माना
आधी हक़ीकत आधा फ़साना
चश्मा उठाओ, फिर देखो यारो
दुनिया नयी है, चेहरा पुराना
कहता है जोकर   ...

3.
खिलते हैं गुल यहाँ, खिलके बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ, मिलके बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ...

4.
स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!

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Guard LP Rajak Jabalpur July 20th, 2018 09:22 IST

नीरज जी १९४४ मैं भेड़ाघाट जबलपुर मैं नौकाविहार करते समय इस कविता को बोल पड़े। जो आज भी ६४ साल बाद मुझे तरन्नुम के साथ याद है। “चाँदनी बिखेरती रात जगमगा रही और हमें संग लिये नाव चली जा रही ......”

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।