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पहले था पुलिस का मुखबिर, मोटी रकम के लालच में बना जैश का आतंकी

October 07th, 2019 19:37 IST
पहले था पुलिस का मुखबिर, मोटी रकम के लालच में बना जैश का आतंकी

हाईलाइट

  • पुलिस का मुखबिर नेंगरू बना जैश-ए-मोहम्मद का समर्थक
  • J&K में आतंकवादियों की कराता था आवाजाही
  • पैसों के लालच में करता था हथियारों की तस्करी

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का एक ट्रक ड्राइवर आशिक अहमद नेंगरू किसी समय पुलिस का मुखबिर था, लेकिन मोटी रकम की लालच में अब वह आतंकवादी बन गया है। एक समय भारत समर्थक कश्मीरी रहा नेंगरू पैसे की लालच में फंस गया और हथियारों, नशीले पदार्थों और आतंकवादियों को भारत में भेजने वाला एक सबसे बड़ा सरगना बन गया है।

हाल ही में पंजाब में एक ड्रोन के गिरने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नए पोस्टर बॉय नेंगरू द्वारा घाटी में भेजे गए 40 से ज्यादा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। जैश-ए-मोहम्मद भारत विरोधी अभियानों को गति देने के लिए बेचैन है।

नेंगरू ने प्रशिक्षित आतंकवादियों की जम्मू-कश्मीर के रास्ते भारत में घुसपैठ कराई है। इनमें कुछ फिदायीन हमलावर शामिल भी हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस की देख-रेख में नेंगरू ने पिछले महीने हथियार गिराने के सनसनीखेज मामले की साजिश रची, जिसके तहत सीमा पार से घातक हथियारों की तस्करी कर भारत लाने के लिए ड्रोन्स भी इस्तेमाल किए गए थे।

खुफिया एजेंसियों द्वारा नेंगरू पर बनाए गए डोजियर के मुताबिक, भारतीय सेना का मुखबिर रहा नेंगरू ने मुठभेड़ों में मारे गए कई खूंखार आतंकवादियों के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं दी थी। एक चालक के तौर पर श्रीनगर से 12 किलोमीटर दूर काकापोरा (पुलवामा) में रहने वाले नेंगरू ने अलगाववादी नेताओं और भारत-विरोधी लोगों के बीच मजबूत नेटवर्क स्थापित किया था। इस नेटवर्क के कारण नेंगरू को श्रीनगर में और उसके आस-पास आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों की अंदरूनी जानकारी रहती थी।

हालांकि पैसे की लालच ने नेंगरू को अलगाववादियों का शुभचिंतक बना दिया है। डोजियर के अनुसार, नेंगरू बाद में हिजबुल मुजाहिदीन के एक नेता के संपर्क में आया, जिसने उसे घाटी में पत्थरबाजों के गढ़ पुलवामा में पत्थरबाजी की घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी। नेंगरू हर एक भारत-विरोधी गतिविधि के लिए दो हजार रुपये लेता था। ऐसे कामों में आकर्षित होते हुए नेंगरू ने हिजबुल मुजाहिदीन को छोड़ दिया और घाटी में ISI का प्रमुख नुमाइंदा बन गया।

अपने आकाओं से मिलने वाली मोटी रकम से उसने कुछ ट्रक खरीदे और हथियारों की तस्करी में संलिप्त हो गया। साथ ही वह आतंकवादियों की भी आवाजाही कराने लगा। अंत में वह जैश से जुड़कर पाकिस्तानी अधिकृत कश्मीर में घुस गया।

डोजियर में खुलासा हुआ है कि नेंगरू का भाई मोहम्मद अब्बास जैश का आतंकवादी था जो कुछ सालों पहले पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। उसका एक दूसरा भाई रियाज भी जैश में शामिल हो गया जिसे तीन आतंकवादियों को जम्मू से श्रीनगर ले जाने के आरोप में पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार कर लिया गया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों ने खुलासा किया है कि अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद घाटी में कई बम विस्फोट करने की कोशिशों के तहत नेंगरू ने घाटी में हथियारों की तस्करी करने की साजिश रची थी। हालांकि पंजाब और जम्मू-कश्मीर सीमा पर लखनपुर में सुरक्षा बल द्वारा 12 सितंबर को JK 13 E 2000 नंबर के एक ट्रक जब्त कर लिया गया, जिससे चार AK-56 और दो AK-47 रायफलें बरामद की गई थीं।

सूत्रों के मुताबिक इन हथियारों की बरामदगी के बाद एजेंसियों ने ISI की उन साजिश का भंडाफोड़ कर दिया था, जिसमें वह अंतर्गत नेंगरू के माध्यम से किसी आतंकवादी घटना को अंजाम देने वाला था।

फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पंजाब और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर मामले की जांच कर रही है।

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