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नागरिकता संशोधन बिल का जबरदस्त विरोध, सड़कों पर जलाए टायर, परीक्षाएं रद्द

नागरिकता संशोधन बिल का जबरदस्त विरोध, सड़कों पर जलाए टायर, परीक्षाएं रद्द

हाईलाइट

  • CAB के विरोध के बीच कई राज्यों में मंगलवार को सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया
  • इस विधेयक को सोमवार रात को लोकसभा में आराम से पारित किया गया
  • बिल का उद्देश्य गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध के बीच कई राज्यों में मंगलवार को सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इस विधेयक को सोमवार रात को लोकसभा में आराम से पारित कर दिया गया। इस बिल का उद्देश्य गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार रहे हैं और वहां से बचकर भारत आने में कामयाब हुए।

असम
असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में छात्रों के यूनियनों और वाम-लोकतांत्रिक संगठनों के बुलाए गए राज्यव्यापी बंद के चलते व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन और नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन की अगुवाई में भारत बंद का आह्वान एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईडीडब्ल्यूए, एआईएसएफ और आइसा सहित वामपंथी संगठनों ने किया था।

बंगाली बहुल बराक घाटी पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। हालांकि शहर के मालीगांव इलाके में एक सरकारी बस पर पथराव किया गया और एक स्कूटर में आग लगा दी गई। दुकानें, बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अलावा शैक्षणिक और वित्तीय संस्थान भी दिनभर बंद रहे। गुवाहाटी के विभिन्न क्षेत्रों में विशाल जुलूस निकाले गए, प्रदर्शनकारियों ने विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के खिलाफ नारे लगाए।

गुवाहाटी में सचिवालय और विधानसभा भवनों के पास सुरक्षाबलों के साथ हाथापाई करने वाले आंदोलनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा कि असम में ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने पटरियों को अवरुद्ध कर दिया था। उनमें से कुछ ने एनएफ रेलवे मुख्यालय के प्रवेश द्वार को और कामरूप जिले के रंगिया में डिवीजनल रेलवे प्रबंधक कार्यालय को ब्लॉक करने का प्रयास किया।

निजी और सार्वजनिक दोनों वाहन सड़कों पर दिखाई नहीं दिए। हालांकि सरकार की ओर से संचालित असम राज्य परिवहन निगम (एएसटीसी) बसें पुलिस एस्कॉर्ट के साथ गुवाहाटी शहर और एलजीबी हवाई अड्डे के बीच चलाई गई। बंद के मद्देनजर विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं रद्द कर दी गई। डिब्रूगढ़ जिले में, बंद समर्थक CISF कर्मियों के साथ भिड़ गए। उनमें से तीन को चोटें लगीं है। उन्होंने दुलियाजान क्षेत्र में ऑइल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के श्रमिकों को कार्यालय में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की।

प्रदर्शनकारियों ने असम के विभिन्न हिस्सों में वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए टायर जलाए और राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध किया। असमिया फिल्म उद्योग के अभिनेताओं और गायकों ने चंदेरी इलाके में एक प्रदर्शन का आयोजन किया। उनमें से कुछ ने शहर के उझान बाजार इलाके में एक रैली में भी भाग लिया। गुवाहाटी विश्वविद्यालय और गुवाहाटी में कपास विश्वविद्यालय के छात्रों ने जोरहाट में असम कृषि विश्वविद्यालय के साथ सड़कों पर उतरकर कानून वापस लेने की मांग की।

अरुणाचल प्रदेश
उत्तर-पूर्व छात्र संगठन (NESO) ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में बंद बुलाया। 11 घंटे के नॉर्थ ईस्ट बंद के दौरान मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। अधिकारियों ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थान, बैंक, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहे। सुबह 5 बजे शुरू हुए बंद के दौरान सार्वजनिक और निजी वाहन सड़क पर दिखाई नहीं दिए। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति लगभग शून्य थी।

इटानगर में, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-415 पर टायर जलाए और पथराव भी किया। NESO के एक घटक, ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) ने भी विधेयक का विरोध करने के लिए राज्य की राजधानी में धरना प्रदर्शन किया। AAPSU के महासचिव तबोम दाई ने कहा, 'हम बहुत शुरुआत से ही CAB के खिलाफ लड़ रहे हैं क्योंकि कई अंतर्निहित मुद्दे हैं, जिनका प्रभाव भविष्य पर पड़ सकता है।'

त्रिपुरा
अगरतला शहर में महिलाओं सहित कई लोगों ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और राज्य को विधेयक के दायरे से बाहर रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में से एक ने एएनआई से बात करते हुए कहा, 'हम नहीं चाहते कि यह विधेयक यहां लागू हो। यह हमारे अधिकार के खिलाफ है।'

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम पहले से ही अल्पमत में हैं और अब हम नहीं चाहते कि दूसरे देशों के लोग यहां बसें।' प्रदर्शनकारियों को विधेयक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सुना गया और उन्हें 'त्रिपुरा को दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए' के ​​नारे के साथ तख्तियां पकड़े भी देखा गया। 

नागालैंड
नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (NSF) के सदस्यों ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में राजभवन के बाहर धरना दिया। राजभवन के बाहर कानून के खिलाफ नारे लगाते हुए, एनएसएफ के छात्रों ने इस बिल की तत्काल वापसी की मांग की। NESO के पूर्व महासचिव एनएसएन लोथा के साथ विभिन्न कॉलेजों के स्वयंसेवक भी डेढ़ घंटे तक बैठे रहे।

विरोध स्थल पर बोलते हुए, NSF के अध्यक्ष निनोटो अवोमी ने कहा, 'हम सभी जानते हैं कि उत्तर पूर्व में स्वदेशी लोगों की संस्कृति और पहचान अवैध आप्रवासियों से बड़े पैमाने पर खतरे का सामना कर रही है। यह विधेयक आप्रवासियों की आमद को भी प्रोत्साहित करेगा।' उन्होंने कहा, 'हमें बताया गया है कि नागालैंड को नागरिकता (संशोधन) विधेयक के दायरे से छूट दी गई है, लेकिन इनर लाइन परमिट (ILP) और अन्य प्रावधानों के बावजूद, राज्य अवैध इमिग्रेशन को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है।'

मेघालय 
मेघालय में भी नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में NESO के घटक खासी छात्र संघ (KSU) के बुलाए गए एक राज्यव्यापी प्रदर्शन के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने कहा कि दुकानें, बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान के साथ-साथ शैक्षणिक और वित्तीय संस्थान दिनभर बंद रहे। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय खुले थे लेकिन 10 फीसदी से कम उपस्थिति दर्ज की गई। बंद सुबह 5 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक जारी रहा।

पूर्वी खासी हिल्स के जिला उपायुक्त एम डब्ल्यू नवाबरी ने पीटीआई को बताया कि राज्य की राजधानी में टायरों को जलाने और वाहनों में तोड़-फोड़ की घटनाओं की सूचना मिली है। अधिकारियों ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सीआरपीएफ बल तैनात किए गए हैं। नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (NESO) ने नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में क्षेत्र में बंद का आह्वान किया था।

नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर राजनीतिक दलों, छात्रों के निकायों और सिविल सोसाइटी ग्रुपों ने विरोध प्रदर्शन किया। पूर्वोत्तर छात्र संघ ने जंतर-मंतर पर बिल के खिलाफ धरना दिया। विभिन्न क्षेत्रों और संगठनों के लोग इसमें शामिल हुए। सीपीएम की दिल्ली स्टेट कमेटी के सदस्यों ने भी बिल के खिलाफ उसी स्थान पर विरोध प्रदर्शन किया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसदों ने पहले संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया था। लेफ्ट पार्टी के सदस्य 'CAB वापिस लो' और 'धर्म अधारित CAB नहीं चलेगा' के बैनर ले जाते देखे गए। सीपीएम के प्रकाश करात ने कहा, 'लोकसभा ने सोमवार रात को नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर दिया। यह कानून हमारे संविधान के खिलाफ है। यह कानून संसद में विरोध के बावजूद पारित कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल
सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (SUCI) के सदस्यों ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक (CAB) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि यह कदम देश के मुस्लिम समुदाय के खिलाफ एक 'साजिश' है। एएनआई से बात करते हुए, एसयूसीआई के सचिव, गौतम भट्टाचार्य ने कहा: 'हम सीएबी के खिलाफ विरोध कर रहे हैं क्योंकि हमारे देश में मुसलमानों को जगह नहीं मिल पाएगी। देश में पड़ोसी देशों के बाहरी लोगों को जगह दी जा रही है। यह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ एक साजिश है।'

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