दैनिक भास्कर हिंदी: राहुल को अखिलेश का साथ पसंद, चाचा शिवपाल को कांग्रेस में No Entry

February 23rd, 2018

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। समाजवादी पार्टी में जिस दिन से पार्टी की कमान भतीजे अखिलेश यादव के हाथ में आई है। परिवार में कुछ मतभेद होने लगे, पहले पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव नाराज हुए और फिर चचा शिवपाल यादव भी थोड़े नाराज हो गए। यह नाराजगी लगातार बनी भी हुई है। जिसकी झलकियां गाहे बगाहे किसी न किसी मौके पर दिख ही जाती है। हाल ही में सपा के एक कार्यक्रम में शिवपाल और कुमार विश्वास एक साथ दिखे थे, जहां पार्टी में कोई तवज्जो न दिए जाने का दर्द छलका था। ऐसे में चचा शिवपाल के कांग्रेस में शामिल होने की सुर्खियां भी आने लगी। हालांकि शिवापाल ने खुद इस खबर को खारिज किया है कि वह कांग्रेस का हाथ नहीं थामेंगे।

 

शिवपाल ने खुद खारिज की अफवाहें

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बसपा से गठबंधन संबंधी एक सवाल पर शिवपाल ने कहा कि इस बारे में पार्टी का राष्ट्रीय नेतत्व ही फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि राजनीति में समय के अनुसार परिवर्तन होता रहता है और होना भी चाहिए। उन्होंने भाजपा सरकार को जन विरोधी बताया। कहा कि भाजपा के शासन में भ्रष्टाचार बढ़ा है। मोदी और योगी ने जनता से जो वादे किए थे। उन पर वे खरा नहीं उतर सके। भाजपा की सरकार में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी खराब है। लूट, डकैती, हत्या जैसी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। वैसे तो शिवापाल से अखिलेश यादव खफा खफा रहते हैं, लेकिन उनके चचा का ये बयान उनको थोड़ी राहत जरूर देगा।

 

शिवपाल सिंह यादव ने यह भी कहा कि वह किसी भी दल में शामिल नहीं होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि पूरा सपा परिवार एक रहे। इसलिए कोई ऐसा वैसा कदम नहीं उठाने जा रहे। शिवपाल ने कहा कि फिलहाल वे समाजवादी पार्टी में ही हैं, उन्हें पार्टी से निकाला नहीं गया। हम नेताजी का सम्मान करते हैं। वे जैसा कहेंगे वैसा ही हम करेंगे। वहीं भतीजे और पूर्व सीएम अखिलेश यादव को अब भी राहुल का हाथ थामे रखने की इच्छा है। कह लीजिए कि अखिलेश को राहुल का साथ पसंद है।

 


 

 

कांग्रेस को अखिलेश का साथ पंसद


यूपी के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने भी शिवपाल के कांग्रेस में शामिल होने पर फिलहाल विराम लगाते हुए कहा कि अभी जो शामिल हुए हैं बस वहीं हैं। दरअसल कांग्रेस विपक्षी दलों को जोड़े रखने और भाजपा के खिलाफ एक मोर्चा खड़ा करना चाहती है। बीते चुनावों में अखिलेश और राहुल ने जमकर एक दूसरे का साथ दिया था। हालांकि दोनों को ही इसका कोई फायदा नहीं मिला था। राहुल गांधी और बहन प्रियंका वाड्रा यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान व्यक्तिगत तौर पर अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव के करीब आए थे। जिसके चलते गठबंधन पर बात बनी।

 

 

कांग्रेस शिवपाल को लेकर नहीं उठाना चाहती जोखिम


राहुल गांधी-अखिलेश यादव के साथ भविष्य की राजनीति का तानाबाना बुनना चाहते हैं ऐसे में शिवपाल को पार्टी में लाकर बात बिगाड़ने का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे। हालांकि शिवपाल यादव ने खुद ही मना कर दिया। शिवपाल के समर्थकों के साथ आने पर सीधा असर समाजवादी पार्टी पर पड़ेगा। वहीं देश के अन्य विपक्षी दलों में इसका खराब मैसेज भी जाएगा। अभी बीते दिन ही बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस में शामिल हुए हैं। वहीं कांग्रेस को इस बात की चिंता है कि शिवपाल यादव के पार्टी में आने पर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी के तौर राज्य का अध्यक्ष बनाना होगा। 

 

दूसरी तरफ गुलाम नबी का कहना है कि जिस तरह से पार्टी के हालात बदल रहे हैं, दूसरी पार्टियों के नेताओं का कांग्रेस में आना दर्शाता है कि लोग राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं। नेताओं के आने की संख्या नहीं थमेगी और कांग्रेस देश की मजबूत पार्टी बनकर उभरेगी।