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शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए धार्मिक नेताओं ने की लोगों की सराहना

शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए धार्मिक नेताओं ने की लोगों की सराहना

हाईलाइट

  • एनएसए डोभाल ने प्रमुख हिंदू व मुस्लिम धार्मिक नेताओं के साथ बैठक की
  • धार्मिक नेताओं ने लोगों से अमन-चैन बनाए रखने की अपील की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के एक दिन बाद रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने प्रमुख हिंदू और मुस्लिम धार्मिक नेताओं के साथ बैठक की। इसमें धार्मिक नेताओं ने शांति और सद्भाव बनाए रखने के सभी प्रयासों में सरकार की तारीफ की और भारत की जनता को धन्यवाद दिया। कुछ राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा हालात का फायदा उठाने की कोशिश की आशंका के बीच उन्होंने अमन-चैन बनाए रखने की अपील की।

बैठक के बाद शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि मुझे वास्तव में अपने राष्ट्र पर गर्व है कि इतना बड़ा मुद्दा जो वर्षों से लंबित था, जो इतनी आसानी से हल हो गया। हिंदू और मुस्लिम दोनों ने बहुत धैर्य से काम लिया है, यह बेहद सराहनीय है।

वहीं ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि सभी ने प्रेम के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार किया है। हम साथ आए हैं और इसे सफल बनाया है। मैं अपने मुस्लिम भाइयों को धन्यवाद देना चाहता हूं। कोई भी जीता या हारा नहीं है, पूरी दुनिया हमारे देश की प्रशंसा कर रही है।

डोभाल के आवास पर यहां चार घंटे की बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान के मुताबिक कि बैठक में जिन लोगों ने हिस्सा लिया, वो इस तथ्य से वाकिफ हैं कि देश के बाहर और भीतर, कुछ राष्ट्रविरोधी और असामाजिक तत्व हमारे राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं। देशभर के धार्मिक नेताओं और हिंदू धर्माचार्य सभा और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने बैठक में शिरकत की। बयान में कहा कि बातचीत से सभी समुदायों के बीच सद्भावना और बंधुता बनाए रखने के लिए शीर्ष धार्मिक नेताओं के बीच संवाद मजबूत हुआ। बैठक में शामिल सभी लोगों ने कानून के शासन और संविधान में पूरी आस्था जताई। 

नेताओं ने संतोष जताते हुए कहा कि दोनों समुदायों के करोड़ों भारतीयों ने जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और संयम का परिचय दिया। बैठक के बाद स्वामी परमात्मानंद सरस्वती ने कहा कि कुछ लोग गड़बड़ी फैलाना चाहते हैं और इस बैठक में सुनिश्चित किया गया कि ऐसे लोगों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती दरगाह के प्रमुख सैयद जैनुल अबेदीन अली खान ने कहा कि इस तरह की बैठक की सराहना करनी चाहिए। मरकाजी जमीयत अहले हदीस हिंद के अध्यक्ष मौलाना असगर अली सलाफी ने कहा कि हम कहते रहे हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे। जब दिन आया तो जो कहा गया तो वह साफ हो गया। फैसले के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर सभी तरह की आशंकाएं गलत साबित हुईं।

योग गुरु रामदेव ने कहा कि अगर कुछ सवाल हैं भी तो हम देश की एकजुटता और अखंडता बनाए रखने के लिए उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं मुस्लिमों से मंदिरों के लिए, हिंदुओं से मस्जिदों के लिए योगदान की अपील करता हूं। हमें ऐसे प्रायोगिक कदमों को आगे ले जाना चाहिए।

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