नई दिल्ली : देशभर के साधु-संत शामिल होंगे, यूपी की ‘संस्कृति संसद’ में

November 1st, 2021

हाईलाइट

  • बीजेपी ने यूपी में ‘हिन्दुत्व कार्ड’ खेलने की तैयारी कर की
  • अमित शाह संस्कृति संसद के समापन समारोह में शिरकत कर सकते हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में ‘हिन्दुत्व कार्ड’ खेलने की तैयारी कर ली है। वाराणसी में 12 से 14 नंवबर तक आयोजित होने वाली संस्कृति संसद में बीजेपी देशभर के साधु-संतों को शामिल करने जा रही है। इस संसद में हिंदुत्व से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा। यूपी में विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले वाराणसी में संस्कृति संसद आयोहित की जा रही है। विशेष बात यह है कि चर्चा में शामिल वही मुद्दे हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजप के मुख्य मुद्दे रहे हैं। जैसे कि, कॉमन सिवल कोड, मथुरा-काशी की मुक्ति, मंदिरों की सरकार के अधिग्रहण से मुक्ति, धर्मांतरण और घर वापसी जैसे एजेंडों पर प्रस्ताव पास कराया जाएगा। सूत्रों के अनुसार संस्कृति संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका वर्चुअली उद्घाटन भी कर सकते हैं वहीं गृह मंत्री अमित शाह संस्कृति संसद के समापन समारोह में शिरकत कर सकते हैं। 

वाराणसी में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्र नंद सरस्वती ने आज कहा  कि देश में हर 6 माह में एक चुनाव होता है, तो क्या आचार संहिता के चलते हिंदू अपनी बात करना बंद कर दे? उन्होंने कहा कि क्या इस देश में एक विधान नहीं होना चाहिए। विशेष ये है कि संस्कृति संसद में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को भी वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। वहीं बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री कंगना रनौत भी संस्कृति संसद समारोह में भाग लेंगी। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इस कार्यक्रम में अहम भूमिका में रहेंगे। संस्कृति संसद में दलितों और महिला वोटरों को साधने के लिए दलितों और महिलाओं को विस्तृत धार्मिक अधिकार देने के लिए भी धर्मादेश पारित होगा।
बता दें कि संस्कृति संसद में देश और विदेश की उन सभी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने हमेंशा हिंदुत्व और हिंदू धर्म पर मुखर होकर बोला है। संस्कृति संसद में भारतीय इतिहास और विशेष तौर पर मुस्लिम शासन काल के इतिहास को बदलने का भी प्रस्ताव रखा जाएगा। 
 

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