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अयोध्या विवाद: कोर्ट ने एक दिन घटाई डेडलाइन, अब 17 को अंतिम सुनवाई


हाईलाइट

  • चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच कर रही दोनों पक्षों की सुनवाई
  • अंतिम सुनवाई के 4 सप्ताह बाद विवादित भूमि पर सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला
  • गोगोई ने कहा जरूरत पड़ी तो रोजाना एक घंटे और बढ़ा सकते हैं सुनवाई का समय

डिजिटल डेस्क, न​ई दिल्ली। अयोध्या की विवादित भूमि पर बहस के लिए सुप्रीम कोर्ट ने डेडलाइन एक दिन घटा दी है। कोर्ट ने सभी पक्षों को 17 अक्टूबर तक अपनी दलील रखने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद 4 सप्ताह का वक्त 5 जजों की संवैधानिक पीठ लेगी जो विवादित भूमि के केस पर अपना फैसला सुनाएगी। ज्ञात हो कि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने दोंनों पक्षों को 18 अक्टूबर तक का समय दिया गया था। वहीं इसी दिन चीफ जस्टिस सेवानिवृत होंगे।

सूत्रों के मुताबिक अयोध्या विवादित भूमि के मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को 37वें दिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने राम जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई की। कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा कि उनकी अदालत से जो भी समाधान की उम्मीद है, वह 17 अक्टूबर तक अपने तर्कों और सबूतों के साथ रख दें। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने कहा कि मस्जिद वह स्थान है, जहां अल्लाह का नाम लिया जाता है। यहां लोग नमाज अता करते हैं। इस पर जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा कि क्या मस्जिद दैवीय है? क्या यह अल्लाह को समर्पित है? इस पर धवन ने कहा कि यह हमेशा से दैवीय है। हम दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं। ये अल्लाह को ही समर्पित है।

सुनवाई की अंतिम तारीख के 4 सप्ताह बाद फैसला
17 अक्टूबर तक सभी पक्षों की दलील खत्म होने के ​बाद 5 जजों की बैंच अपना 4 हफ्ते का वक्त लेगी, ताकि वे अपना फैसला लिख सके। मुस्लिम पक्ष के वकील धवन पहले भी अधिक समय की मांग कर चुके हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि हमें मिलकर प्रयास करना चाहिए कि सुनवाई 18 अक्टूबर तक खत्म हो जाए, लेकिन अब इसकी तारीख अब 17 अक्टूबर कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो हम सुनवाई का समय रोजाना एक घंटे और बढ़ा सकते हैं। जरूरत पड़ी तो हम शनिवार को भी सुनवाई करेंगे।

दोनों पक्ष रख रहे अपने तर्क और प्रमाण
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट अयोध्या की भूमि विवाद पर लगातार सुनवाई कर रहा है। हिंदू पक्षकारों ने 16 दिन में अपनी दलीलें रख दी हैं और अब मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें पेश कर रहा है। धवन ने सोशल मीडिया पर मिली धमकियों का भी कोर्ट में जिक्र किया था। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी पक्ष बिना किसी डर के अपने तर्क और प्रमाण कोर्ट के समक्ष रखें।

17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं चीफ जस्टिस 
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच मामले की सुनवाई कर रही है और चीफ जस्टिस का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो जाएगा। इससे पहले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की निर्बाध गति से सुनवाई चलती रहेगी और साथ में मध्यस्थता भी चल सकता है।

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