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सुभाष चोपड़ा बनाए गए दिल्ली कांग्रेस के चीफ, कीर्ति आज़ाद बने कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष

सुभाष चोपड़ा बनाए गए दिल्ली कांग्रेस के चीफ, कीर्ति आज़ाद बने कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष

हाईलाइट

  • विधानसभा चुनाव से पहले सुभाष चोपड़ा को दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है
  • क्रिकेटर से राजनेता बने कीर्ति आज़ाद को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है
  • दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मृत्यु के बाद से ये पद खाली पड़ा हुआ था

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से पहले सुभाष चोपड़ा को दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जबकि क्रिकेटर से राजनेता बने कीर्ति आज़ाद को डीपीसीसी की कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले अटकले लगाई जा रही थी कि आजाद को दिल्ली कांग्रेस का प्रमुख बनाया जा सकता है।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मृत्यु के बाद से ये पद खाली पड़ा हुआ था और पार्टी तीन कार्यकारी अध्यक्षों के साथ काम कर रही थी। चोपड़ा दिल्ली कांग्रेस के प्रमुख थे जब दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थी।

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली के नेताओं के साथ विचार-विमर्श करने के बाद सुभाष चोपड़ा को चुना है। कांग्रेस पिछले दो महीनों से तीन कार्यकारी अध्यक्षों - हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राजेश लिलोथिया - के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी में अपने मामलों को संभाल रही थी।

सुभाष चोपड़ा 1968 में छात्र नेता के तौर पर कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुए। 1970-71 में दिल्ली छात्र संघ के अध्यक्ष बने। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कई पदों पर रहे। सुभाष चोपड़ा दिल्ली कांग्रेस के सचिव, खाजानची और महासचिव के अलावा उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही 16 जुलाई 2003 तक वे दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे।

सुभाष चोपड़ा 1968 में चौथे मेट्रोपोलिटन काउंसिल के सदस्य और 1998 व 2003 में विधायक बने। जून 2003 से दिसंबर 2003 तक विधानसभा के स्पीकर रहे. 2008 में वे फिर विधायक बने।

कांग्रेस आलाकमान के सामने बड़ी चुनौती दिल्ली के सामाजिक एवं क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के साथ ही पार्टी की आंतरिक कलह पर अंकुश लगाने की भी थी। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी किसी युवा नेता के पक्ष में थे। इसी क्रम में कुछ हफ्ते पहले दिल्ली के कुछ युवा नेताओं का साक्षात्कार भी लिया गया था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।