दैनिक भास्कर हिंदी: अयोध्या मामले की नई तारीख, 26 फरवरी को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

February 21st, 2019

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई 26 फरवरी को होगी।
  • 5 जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।
  • ये पीठ साल 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर 14 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई 26 फरवरी को होगी। 5 जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। ये पीठ साल 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर 14 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इससे पहले 29 जनवरी को ये सुनवाई होनी थी, लेकिन जस्टिस बोबडे छुट्टी पर चले गए थे जिस कारण सुनवाई टाल दी गई थी।

अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए जिस पांच सदस्यीय बेंच का गठन किया गया है उसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर है। इससे पहले 10 जनवरी को अयोध्या मामले की सुनवाई हुई थी। रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली बेंच में शामिल जस्टिस एन.वी. रमन्ना, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस यू.यू. ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मामले की सुनवाई की थी। हलांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बेंच में जस्ट‍िस उदय उमेश ललित के शामिल होने पर सवाल उठाए थे जिसके बाद यूयू ललित ने खुद को इस बेंच से हटा लिया था और नई बेंट गठित की गई थी।

क्या है पूरा विवाद?
अयोध्या मामला इस देश का सबसे बड़ा विवाद है। जिस पर राजनीति भी होती रही है और सांप्रदायिक हिंसा भी भड़की है। हिंदू पक्ष ये दावा करता है कि अयोध्या का विवादित ढांचा भगवान राम की जन्मभूमि है और इस जगह पर पहले राम मंदिर हुआ करता था। जिसे बाबर के सेनापति मीर बांकी ने 1530 में तोड़कर यहां पर मस्जिद बना दी थी। तभी से हिंदू-मुस्लिम के बीच इस जगह को लेकर विवाद चलता रहा है।

माना जाता है कि मुग़ल सम्राट बाबर के शासन में हिंदू भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया। मस्जिद बाबर ने बनवाई इसलिए इसे बाबरी मस्जिद कहा गया।अयोध्या विवाद ने 1989 के बाद से तूल पकड़ा और 6 दिसंबर 1992 को हिंदू संगठनों ने अयोध्या में राम मंदिर की जगह बनी विवादित बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया था। इसके बाद से ये मामला कोर्ट में है।     

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