comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

देश में पहली बार ट्रेन लेट होने पर मुआवजा, तेजस एक्सप्रेस पहुंची थी 2 घंटे लेट

देश में पहली बार ट्रेन लेट होने पर मुआवजा, तेजस एक्सप्रेस पहुंची थी 2 घंटे लेट

हाईलाइट

  • हाल ही में लॉन्च हुई तेजस एक्सप्रेस शनिवार को दोनों तरफ लगभग दो घंटे देरी से पहुंची
  • रेलवे प्रत्येक यात्री को मुआवजे के रूप में 250 रुपये देगी
  • देश में पहली बार ट्रेन लेट होने पर यात्रियों को मुआवजा दिया जाएगा

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। हाल ही में लॉन्च हुई तेजस एक्सप्रेस शनिवार को दोनों तरफ लगभग दो घंटे देरी से पहुंची, जिसके बाद ट्रेन अपने प्रत्येक यात्री को मुआवजे के रूप में 250 रुपये देगी। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि ट्रेन लेट होने पर यात्रियों को मुआवजा दिया जाएगा। लखनऊ से ट्रेन में लगभग 450 यात्री सवार हुए थे और नई दिल्ली से लगभग 500।

आईआरसीटीसी के लखनऊ के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक (सीआरएम) अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा, हमने सभी यात्रियों के मोबाइल पर एक लिंक भेजी है, जिसपर क्लिक करने से वे अपने मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसा करने पर उन्हें मुआवजा मिल जाएगा।

चार अक्टूबर को लखनऊ से लॉन्च हुई तेजस भारतीय रेलवे की पहली निगमीकृत ट्रेन है, जिसका संचालन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) करता है।

पहली बार ऐसा होगा कि यात्रा में देरी होने पर यात्रियों को मुआवजा दिया जाए। मुआवजा तब दिया जाता है जब ट्रेन अपने अंतिम स्टेशन पर निर्धारित समय से देरी से पहुंचती है। वहीं अगर निर्धारित समय से देरी से चलने के बावजूद ट्रेन अंतिम स्टेशन पर समय से पहुंचती है तो मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

तेजस शनिवार को लखनऊ से अपने निर्धारित समय सुबह 6.10 बजे के बजाय पहली बार लगभग 8.55 पर चली और नई दिल्ली दोपहर 12.25 बजे के बजाय 3.40 पर पहुंची। इसके बाद वह नई दिल्ली से दोपहर 3.35 बजे के बजाय शाम को लगभग 5.30 बजे चली।

रखरखाव मेंटेनेंस में देरी होने के कारण ट्रेन को देरी हो गई थी। अपनी नियमित यात्रा पर रवाना होने से पहले हर ट्रेन में रखरखाव किया जाता है। शनिवार को तेजस का रखरखाव सुबह लगभग चार बजे शुरू किया जा सका क्योंकि लखनऊ स्टेशन पर मेंटीनेंस यार्ड में शंटिंग के दौरान एक कोच पटरी से उतर गया था।

देरी होने के कारण यात्रियों को अतिरिक्त चाय, दोपहर का खाना और उन्हें दिए गए रिफ्रेशमेंट के पैकेट्स पर सॉरी फॉर डिले छपा हुआ था। इस दौरान घोषणा कर यात्रियों को ट्रेन के लेट होने की सूचना भी दी गई।

कमेंट करें
AB4q2
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।