दैनिक भास्कर हिंदी: कश्मीर में आतंकियों ने विकलांग किसान की हत्या की

August 17th, 2020

हाईलाइट

  • कश्मीर में आतंकियों ने विकलांग किसान की हत्या की

श्रीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। आतंकवादियों ने शारीरिक रूप से अक्षम किसान आजाद अहमद डार की हत्या कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आतंकवादियों द्वारा बेवजह की जा रही हिंसा उन्हीं कश्मीरियों को खा रही है, जिनकी तथाकथित स्वतंत्रता के लिए वे लड़ने का दावा करते हैं।

पुलिस ने कहा है कि 15 अगस्त की रात करीब 8 बजे डार के घर में घुसे तीन आतंकवादियों ने उसे गोलियों से छलनी कर दिया।

किसी भी आतंकवादी संगठन ने डार की निर्दयता से की गई हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है और फिर भी स्थानीय समाज इस हद तक एक दूसरे से जुड़ा हुआ है कि आतंकी स्वीकार करें या न करें, लोगों को किसी न किसी तरह से पता चल जाता है कि किसने किसे मारा है।

पुलवामा जिले के कंगन गांव का विकलांग किसान डार (40) पूरे गांव का सबसे गरीब किसान था।

रिपोटरें में कहा गया है कि गांव में कोई भी कभी भी डार को अपने दामाद के रूप में स्वीकार करने के लिए सहमत नहीं हुआ क्योंकि उन्हें ऐसा लगता था कि यदि कोई ऐसा करता तो इसका मतलब होगा कि वह अपनी बेटी को दुख और पीड़ा में धकेल देगा।

डार ने बिहार की एक महिला से शादी की जिससे उसे 10 साल की एक बेटी है।

गांव के एक बुजुर्ग ने नाम न बताने के आग्रह पर बताया, अपने और अपने परिवार के लिए दो समय के भोजन का प्रबंधन करना भी उसके लिए मुश्किल था क्योंकि वह अपनी शारीरिक स्थिति के कारण के कारण अपनी छोटी सी जमीन पर ठीक से खेती भी नहीं कर पाते थे। वह ना तो किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित थे, न ही उन्होंने कभी सुरक्षा बलों या आतंकवादियों के साथ बातचीत करने की कोशिश के बारे में सुना गया था। उसकी हत्या ने हम सभी को हैरान कर दिया है। क्या अब हम आखिरकार एक-दूसरे को सिर्फ इसलिए मार रहे हैं क्योंकि हमें मारना है।

कश्मीर में पिछले 30 वर्षों से चल रही हिंसा में सबसे ज्यादा निर्दोष कश्मीरी मारे गए हैं।

चाहे वह आतंकवादियों द्वारा फैलाया गया बेवजह का आतंक हो या सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच गोलीबारी की घटनाओं में नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत, यह साबित करती है कि हिंसा हमेशा अपने बच्चों को ही खाती है।

एसडीजे/एसएसए