comScore

संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक, विपक्ष उठाएगा कश्मीर का मुद्दा 

September 05th, 2018 17:23 IST
संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक, विपक्ष उठाएगा कश्मीर का मुद्दा 

हाईलाइट

  • 18 जुलाई शुरू होगा संसद का मानसून सत्र
  • विपक्ष उठाएगा कश्मीर का मुद्दा
  • पक्ष-विपक्ष की बहस के बीच हंगामेदार होगा मानसून सत्र

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कश्मीर में बिगड़ते हालातों के बीच अब संसद का मानूसत्र भी 18 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। 10 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है। इस सत्र में कुल 18 बैठकें भी की जाएंगी। संसद के मामलों की संसदीय समिति (सीसीपीए) की बैठक में ये फैसला लिया गया है। सोमवार को हुई इस बैठक में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार, रामविलास पासवान, थावरचंद गहलोत और अन्य सदस्य मौजूद थे। आपसी विचार विमर्श के बाद 18 जुलाई से 10 अगस्त तक का समय मानसून सत्र के लिए तय किया गया।

विपक्ष इस सत्र में जम्मू-कश्मीर में युद्द विराम लागू करने व उससे पैदा होने वाली स्थिति व उसे वापस लिए जाने के साथ ही पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन से सरकार गिरने का मुद्दा उठाएगा। कश्मीर में तेजी बढ़ते आतंकवाद को लेकर भी पक्ष-विपक्ष के बीच जमकर बहस होगी। इसके अलावा विपक्ष किसान, दलित आरक्षण उत्पीड़न समेत कई मसलों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। 

बता दें कि इससे पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को एक अहम बैठक ली थी। जिसमें गृह सचिव, आईबी चीफ समेत कई बड़े अधिकारी शामिल थे। बताया जा रहा है कि इस बैठक में अमरनाथ यात्रा और घाटी के ताजा हालात पर चर्चा हुई और मौजूदा हालात पर समीक्षा की गई है। संसद का ये मानसून सत्र मोदी सरकार के लिए बेहद खास मना जा रहा है। इस सत्र के बाद सिर्फ दो लोकसभा सत्र ही शेष रह जाएंगे। मोदी सरकार भी इस साल अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में इसे अधिक उपयोगी बनाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार अपने सभी जरूरी विधेयक को पारित करवाना चाहेगी। शीतकालीन सत्र और बजट सत्र के पहले हिस्से के बाद ही देश में लोकसभा चुनाव कराएं जाने हैं। 


 

कमेंट करें
mr0Y5
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।