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..तो मी लार्डस के अभेद्य बंगले-दफ्तर इसलिए छावनी बन गए थे!

November 09th, 2019 21:00 IST
 ..तो मी लार्डस के अभेद्य बंगले-दफ्तर इसलिए छावनी बन गए थे!

हाईलाइट

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नई दिल्ली, 9 नवंबर (आईएएनएस)। देश में अदालत कहीं की भी हो, घर से बाहर तक मी-लॉर्ड्स की सुरक्षा का इंतजाम चुस्त-दुरुस्त ही रहता है। इस सबके बावजूद दिल्ली में रहने वाले पांच विशेष मी-लॉर्ड्स के बंगलों का नजारा शुक्रवार को एकदम बदला हुआ था। ये पांच बंगले पहले से ही किसी अभेद्य किले से कम सुरक्षित नहीं थे। लेकिन शुक्रवार शाम इन बंगलों पर हथियारों से लैस खाकी वर्दी वालों की संख्या बढ़ने लगी, और बंगले छावनी में तब्दील हो गए।

देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर भागम-भाग में अपनी-अपनी मंजिल की ओर तेज- रफ्तार दौड़ रहे लोग बंगलों पर वर्दीधारियों की चहलकदमी को बढ़ी देख समझ रहे थे बंगले किसके हैं? इन पांच बंगलों पर ही आखिर इतनी ज्यादा तादाद में हथियारबंद जवान क्यों? यह सवाल तो तमाम राहगीरों के जहन में उभर रहे थे। सवालों के जबाब न कोई देने वाला था, न किसी को जहन में आ रहे सवालों के जबाब पाने की फुर्सत थी। मतलब वही भीड़ की दिल्ली और दिल्ली की भीड़ में सब खोए हुए भागदौड़ में शामिल थे।

इन सवालों का जबाब मिला शनिवार सुबह, जब इन बंगलों में रहने वाले भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश और चार न्यायाधीशों को कड़ी सुरक्षा में सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया। सुप्रीम कोर्ट में सुबह से ही देश-दुनिया भर के मीडिया का जमाववाड़ा था। वजह थी, कई दशक से राजनीतिक रोटियां सेंकने की वजह बने चर्चित बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद पर आने वाला फैसला। इन्हीं पांचों न्यायाधीशों द्वारा ही शनिवार को यह अभूतपूर्व फैसला सुनाया जाना था। दिन में करीब 10.30 से 12 बजे के बीच सुनाए गए फैसले के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुप्रीम कोर्ट को भी किले में बदल रखा था।

दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा के लिए पूरे साल दिल्ली पुलिस एक डीसीपी (पुलिस उपायुक्त) की तैनाती करती है। डीसीपी के अधीन काफी संख्या में पुलिस बल भी होता है। इस सबके बावजूद मंदिर मामले में आने वाले फैसले के मद्देनजर जो अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजामात किए गए थे वे भी काबिल-ए-गौर थे। इन्हीं खास इंतजामों के तहत तीन डीसीपी, एक जॉइंट पुलिस कमिश्नर सहित 200 से ऊपर हथियारबंद जवानों की अलग से शनिवार को सुप्रीम कोर्ट पर तैनाती की गई थी। इनमें बहुतायत थी दिल्ली पुलिस की सुरक्षा बटालियन और नई दिल्ली जिले के पुलिसकर्मियों की। तीन कंपनी यानी करीब 225 हथियारबंद जवान दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा में अलग से और लगाए थे।

जबकि भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गगोई सहित बाकी चार अन्य न्यायाधीशों के बंगलों पर शुक्रवार शाम के वक्त ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने डेरा डाल दिया था। हर बंगले पर सीआरपीएफ के 15 अतिरिक्त हथियारबंद जवान विशेष तौर पर शुक्रवार-शनिवार को लगाए गए थे।

दिल्ली पुलिस अयोध्या भूमि विवाद पर आने वाले फैसले के दिन वैसे भी कोई नई मुसीबत लेने को तैयार नहीं थी। वजह दो नवंबर, 2019 यानी बीते शनिवार को उत्तरी जिले में स्थित तीस हजारी कांड से अभी दिल्ली पुलिस उबर भी नहीं पाई है। उस मामले में वकील और दिल्ली पुलिस के बीच हुई खूनी लड़ाई की जांच दिल्ली हाईकोर्ट ने एक न्यायिक आयोग के हवाले कर रखी है।

-- आईएएनएस

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।