दैनिक भास्कर हिंदी: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसा हो सकता है अयोध्या का भव्य राम मंदिर !

November 10th, 2019

हाईलाइट

  • अयोध्या विवाद पर फैैसले के बाद लोगों में बढ़ रही मंदिर के निर्माण की जिज्ञासा
  • मोदी सरकार को 3 महीने में एक ट्रस्ट और नियम बनाने के आदेश
  • विश्व हिंदू परिषद 50 फीसदी पूरा कर चुका मंदिर निर्माण का कार्य

डिजिटल डेस्क, अयोध्या। दशकों से चल रहे अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने जमीन पर मालिकाना हक रामलला को दिया है। वहीं मुस्लिम पक्ष को किसी अन्य स्थान पर 5 एकड़ की वैकल्पिक जमीन दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए मंदिर निर्माण के लिए केंद्र की मोदी सरकार को 3 महीने में एक ट्रस्ट और नियम बनाने के आदेश दिए हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट का गठन गुजरात के सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की तर्ज पर किया जा सकता है।

कोर्ट के इस फैसले के बाद लोगों में यह जिज्ञासा तेजी से बढ़ने लगी है कि अब रामलला की जन्मभूमि पर राम का भव्य मंदिर कब तक और कैसा बनेगा। तो आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर राम मंदिर कैसा बन सकता है और उसे बनने में कितना समय लगेगा।

निर्माण में कितना समय
यदि मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा तैयार की गई डिजाइन को स्वीकृति मिलती है तो मंदिर बनने में कम से कम 5 साल और लग सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाने से पहले ही परिषद मंदिर की डिजाइन तैयार कर चुका है। मंदिर निर्माण कार्यशाला से जुड़े एक पर्यवेक्षक के मुताबिक मंदिर बनने में कम से कम 5 साल का समय और लगेगा। उसने बताया कि 'वर्तमान में कार्यशाला में एक भी शिल्पकार नहीं है। इसके लिए 250 शिल्प विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी, जो बिना थके और बिना रुके मंदिर निर्माण के लिए अपना योगदान दे सके।' उसने बताया कि 'रजनीकांत सोमपुरा के प्रतिनिधित्व में मंदिर बनाने के लिए पत्थरों पर नक्काशी का कार्य जारी था, लेकिन इसी साल जुलाई में उनका निधन हो गया। इसके बाद से ही मंदिर निर्माण कार्य थमा हुआ है।'

कैसा बनेगा मंदिर
विश्व हिंदू परिषद द्वारा मंदिर का नक्शा उत्तर भारत की नागर शैली पर बनाया गया है, जबकि दक्षिण भारत में द्रविड़ शैली में मंदिरों का निर्माण किया जाता है। यदि परिषद की डिजाइन के अनुसार मंदिर बनाया जाता है तो मंदिर दो मंजिला होगा जो 270 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा होगा। साथ ही गुंबदों के साथ मंदिर की ऊंचाई 141 फीट होगी। इसके अलावा मंदिर का शिखर अष्टकोणीय होगा और परिषद ने इसका डिजाइन भी अष्टकोणीय ही बनाया है। बता दें कि परिषद की कार्यशाला में मंदिर निर्माण का कार्य 50 फीसदी तक पूरा किया जा चुका है।

क्या कहते हैं आर्किटेक्ट चंद्रकांत
आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने बताया कि परिषद के नेता अशोक सिंघल ने मंदिर का नक्शा बनाने का काम उनके परिवार को सौंपा था। उन्होंने बताया कि सोमनाथ मंदिर का नक्शा भी उनके पिता प्रभाशंकर सोमपुरा द्वारा किया गया था। चंद्रकांत के मुताबिक यदि 2000 कारीगर 8 से 10 घंटे तक रोज काम करें तो मंदिर आने वाले ढाई साल में ही बनकर तैयार हो जाएगा, क्योंकि मंदिर निर्माण की आधी सामग्रियां पहले से ही तैयार है इसलिए अब निर्माण में ज्यादा समय नहीं लगेगा। उन्होंने बताया कि यदि तिरुपति की तरह राम मंदिर के आसपास पूरा नगर बसाने के लिए सोचा जा रहा है तो इसके लिए कम से कम 4 साल का समय लग सकता है।

कैसी होगी संरचना

  • 5 द्वार : राम मंदिर में प्रवेश के लिए 5 द्वार होंगे। सिंह द्वार, नृत्य मंडप, रंग मंडप, कौली और गर्भगृह परिक्रमा। इन सभी द्वारों का निर्माण मरकाना के सफेद पत्थरों से किया जाएगा।
  • 2 मंजिल : मंदिर दो मंजिल का बनाया जाएगा। इसकी निचली मंजिल में रामलला की प्रतिमा होगी तो वहीं ऊपरी मंजिल में राम दरबार बनेगा। साथ ही दोनों तल में एक-एक गर्भगृह होगा।
  • 24 दरवाजे : मंदिर में कुल 24 दरवाजे होंगे, जिनकी चौखटें संगमरमर से बनाई जाएंगी।
  • 212 खंभे : मंदिर में कुल 212 खंभे होंगे। जिसमें से 106 खंभे ऊपरी मंजिल में और 106 निचली मंजिल में होंगे।

काशी विश्वनाथ जैसा कॉरिडोर
केंद्र सरकार काशी विश्वनाथ जैसा कॉरिडोर अयोध्या में भी बनवा सकती है। जानकारी के मुताबिक गठित किए जाने वाला ट्रस्ट सोमनाथ मंदिर के ट्रस्ट की तरह अयोध्या में भी 5 किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों-मठों के विकास और देखभाल की जिम्मेदारी ले सकता है। इस दायरे में लवकुश मंदिर, राम मंदिर, रंग महल, राम कचेहरी, इमली बगिया, जगन्नाथ मंदिर, तुलसी मंदिर, हनुमान गढ़ी, सीता रसोई, दशरथ भवन, मोती महल आदि आते हैं।

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