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India-Nepal Relations: जानिए क्या है सेना प्रमुख के नेपाल दौरे के मायने? भारत-नेपाल के संबंधों में जमी बर्फ पिघलेगी!

India-Nepal Relations: जानिए क्या है सेना प्रमुख के नेपाल दौरे के मायने? भारत-नेपाल के संबंधों में जमी बर्फ पिघलेगी!

हाईलाइट

  • भारत और नेपाल के संबंधों में जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है
  • इंडियन आर्मी के चीफ दूसरे राजनयिक मिशन पर 4 नवंबर को काठमांडू जा रहे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और नेपाल के संबंधों में जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है। इंडियन आर्मी के चीफ जनरल एमएम नरवने अपने दूसरे राजनयिक मिशन पर 4 नवंबर को काठमांडू जा रहे हैं। अपने समकक्ष जनरल पूर्ण चंद्र थापा के आमंत्रण पर नरवने नेपाल की यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान जनरल नरवने को एक पुरानी परंपरा के तहत नेपाल सेना के कमांडर की मानद रैंक से सम्मानित किया जाएगा। रॉ प्रमुख सामंत गोयल की यात्रा के तुरंत बाद नरवने का नेपाल दौरा संकेत है कि नई दिल्ली आखिरकार काठमांडू के साथ अपने रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलानी चाहती है। इस साल की शुरुआत में नेपाल के नए नक्शे को जारी किए जाने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी। हालांकि, दोनों देशों के संबंधों में खटास के बावजूद, दोनों सेनाओं ने अपने करीबी रिश्ते को बनाए रखा है। 

जून में संसद ने पास किया विवादित नक्शा
बता दें कि जून में नेपाल की संसद ने नए पॉलिटिकल नक्शे के लिए लाए गए संवैधानिक संशोधन बिल को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। नए नक्शे को मई में नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी ने जारी किया था। नक्शे को देश के संविधान में जोड़ने के लिए 27 मई को संसद में प्रस्ताव भी रखा जाना था, लेकिन नेपाल सरकार ने ऐन मौके पर संसद की कार्यसूची से इसे हटा दिया। हालांकि इसके बाद कानून मंत्री शिवा माया तुंबामफे ने 31 मई को विवादित नक्शे को लेकर संशोधन विधेयक नेपाली संसद में पेश किया था।
नेपाल के नक्शे को लेकर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, 'यह ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। ऐसे में उनका दावा जायज नहीं है। यह सीमा विवाद पर होने वाली बातचीत के हमारे मौजूदा समझौते का उल्लंघन भी है।' 

335 स्क्वायर किलोमीटर जमीन को लेकर विवाद
8 मई को भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया। भारत के इस कदम से नेपाल नाराज हो गया और प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा ने 20 मई को उनके देश का एक नया नक्शा जारी कर दिया। इस नक्शे में भारत के कंट्रोल वाले कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया। जिस हिस्से को लेकर विवाद चल रहा है वो करीब 335 स्क्वायर किलोमीटर का है।

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