दैनिक भास्कर हिंदी: किसान आंदोलन: सरकार-किसानों में नहीं बन रही बात, भाकियू की महापंचायत आज, गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली कूच के लिए जुटेंगे किसान

December 17th, 2020

हाईलाइट

  • कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
  • 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है किसानों का आंदोलन
  • किसानों की मांग है कि सरकार कृषि कानूनों को वापस ले

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है। किसान दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर गुरुवार को होने वाली भारतीय किसान यूनियन की किसान पंचायत के लिए जिले के किसान भी अपने वाहनों से कूच करेंगे। संगठन नेताओं ने बताया कि जिले के किसान परतापुर में इकट्ठा होंगे और यहां से 15 ट्रैक्टरों और एक दर्जन कारों के दिल्ली कूच करेंगे। किसानों का कहना है कि सरकार जिस दिन तीनों कानून वापस ले लेगी, हम आंदोलन समाप्त कर देंगे।

भाकियू ने गाजीपुर बॉर्डर पर आज किसान महापंचायत रखी है। महापंचायत में पश्चिमी यूपी की खापों को पहुंचना है। इस पर सरकार की नजर लगी हुई है। भाकियू जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी और मंडल उपाध्यक्ष रविंद्र दौरालिया का कहना है कि जिले के किसान संगठन पदाधिकारियों के साथ 15 ट्रैक्टरों और एक दर्जन कारों के साथ सुबह गाजीपुर बॉर्डर के लिए कूच करेंगे। मवाना, सरधना, दौराला की तरफ से आने वाले किसानों के वाहन परतापुर में इकट्ठा होंगे। यहां से करीब 10 बजे पंचायत स्थल के लिए एकसाथ कूच करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई होगी
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के आंदोलन को लेकर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सरकार और किसानों के बीच समझौता कराने की पहल की है जिसके लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर इस पर फिर सुनवाई होनी है। सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि ये राष्ट्रीय स्तर का मसला है, ऐसे में इसमें आपसी सहमति होनी जरूरी है। अदालत की ओर से दिल्ली की सीमाओं और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों की लिस्ट मांगी गई, जिससे पता चल सके कि बात किससे होनी है।

किसानों को भी पार्टी बनाने की इजाजत 
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगे हैं। कोर्ट ने किसानों को भी पार्टी बनाने की इजाजत दी है। कल फिर सुनवाई होगी। बुधवार को सुनवाई के दौरान एक पिटीशनर के वकील ने शाहीन बाग के मामले की दलील दी तो, चीफ जस्टिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले में कोई उदाहरण नहीं दिया जा सकता।

बिस्तर और खाना लेकर जाएंगे साथ 
मनोज त्यागी ने बताया कि पंचायत में जाने वाले किसान पूरे इंतजाम के साथ जाएंगे। गरम बिस्तर और खाना लाने की जिम्मेदारी पदाधिकारियों को सौंपी गई है। किसानों को सर्दी से बचाने के पूरे इंतजाम किए जाएंगे। 

पुलिस ने रोका तो वहीं देंगे धरना 
रविंद्र दौरालिया ने बताया कि किसान शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे हैं। कहीं से भी आंदोलन के हिंसक होने की सूचना नहीं है। जो लोग आंदोलन में विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं उनसे भी कार्यकर्ता सख्ती से निपट रहे हैं । इसके बाद भी अगर पुलिस ने किसानों को गाजीपुर बॉर्डर पर जाने से रोका तो किसान वहीं बैठकर धरना देंगे। जब तक सरकार काले कानूनों को वापस नहीं लेगी किसान पीछे नहीं हटेंगे। 

मोदी बोले- सरकार दूर करेगी किसानों की हर शंका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात दौरे के संबोधन में कहा कि विपक्ष किसानों को गुमराह करने की साजिश कर रहा है। उन्हें डराया जा रहा है कि किसानों की जमीन पर दूसरे कब्जा कर लेंगे। यदि कोई डेयरी वाला दूध लेने का कॉन्ट्रैक्ट करता है तो क्या वह पशु को भी ले जाता है? उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर शंका के समाधान को तैयार है। मोदी ने गुजरात में सिख संगठनों से भी मुलाकात की।
 

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