सीजेपी न्यूज: कॉकरोच जनता पार्टी की बढ़ीं मुश्किलें, सौरव दास और आशुतोष रांका का केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर, इस आधार पर होगी जांच

कॉकरोच जनता पार्टी की बढ़ीं मुश्किलें, सौरव दास और आशुतोष रांका का केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर, इस आधार पर होगी जांच
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका के केस क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिए गए हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका के केस क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। अब उनके मामले की जांच क्राइम ब्रांच के अधिकारी करेंगे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस केस को क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया गया है। वह इस मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की पड़ताल करेगी। पार्टी के दोनों नेता जिस मामले में न्यायिक हिरासत में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं, उन पर ट्रेसपासिंग का केस चल रहा है।

क्या होती है ट्रेसपासिंग?

ट्रेसपासिंग का मतलब अनधिकृत प्रवेश होता है। सौरव दास और आशुतोष रांका CJP के समर्थकों के साथ 13 अक्टूबर को गेट कूदकर जंतर-मंतर में दाखिल हो गए थे। जिस जगह पर वे घुसे थे, उसे गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था। इसके बाद भी CJP के नेता वहां तिरंगा लेकर पहुंच गए थे। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी भी की थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। बाद में पुलिस ने ट्रेसपासिंग का केस दर्ज किया था।

दो दिन बढ़ी न्यायिक हिरासत

पुलिस ने 14 अक्टूबर, 2026 को सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे समेत अन्य CJP समर्थकों को हिरासत में लिया था। हालांकि, सौरव और आशुतोष को छोड़कर बाकी लोगों को हिरासत से रिहा कर दिया था। वहीं, दोनों को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। इसके बाद सोमवार (19 अक्टूबर) को उन्हें दोबारा मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ा दी गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होने वाली है।

पेशी के बाद वकील ने क्या कहा?

अदालत की सुनवाई के बाद CJP के वकील ने बताया, "हम बहुत निराश हैं। यह प्रिवेंटिव कस्टडी (एहतियाती हिरासत) का मामला है। कोर्ट ने खुद कहा था कि उन्हें इन लोगों को ज्यूडिशियल कस्टडी (न्यायिक हिरासत) में भेजने की कोई जरूरत नहीं लगती। इसीलिए कोर्ट ने श्योरिटी (जमानतदार) देने को कहा था। जब श्योरिटी पेश किए गए, तो उन्हें शुरू में ही कोई न कोई दिक्कत थी। फिर अगले श्योरिटी को लेकर भी समस्या खड़ी हो गई। कानून के मुताबिक, पहले उन्हें रिहा किया जाना चाहिए और उसके बाद वेरिफिकेशन, श्योरिटी आदि की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। आज उन्होंने एक और श्योरिटी पेश की और सभी जरूरी जानकारी भी दी। आदेश में उन्होंने एक कारण यह बताया कि एक फोटो मेल नहीं खा रही है। फिर उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ आशंका है... यह बहुत परेशान करने वाली बात है। हम देखते हैं कि आगे क्या करना है।"

Created On :   19 Oct 2026 11:31 PM IST

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