DMK की थर्ड फ्रंट पर नजर: ना INDIA , ना NDA , तीसरे मोर्चे से कांग्रेस को लगेगा बड़ा झटका, देश का बदलेगा सियासी समीकरण?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके थर्ड फ्रंट की तैयारी कर रही है। पार्टी ने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए उससे दूरी बना ली है। डीएमके ने कांग्रेस अगुवाई वाले गठबंधन इंडिया गुट से शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ डीएमके का सत्तारूढ़ एनडीए में भी जाने का मूड़ नहीं है, ऐसे में देश की राजनीति में एनडीए और इंडिया ब्लॉक के अलावा तीसरे मोर्चे के आने की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है।
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अब आपको बता दें देश में यदि राजनीतिक दलों का एक और गठबंधन डीएमके बनाती है तो इससे सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगेगा, क्योंकि तीसरे फ्रंट में वो दल भी शामिल हो सकते है जो अभी तक इंडिया गठबंधन में हैं। डीएमके थर्ड फ्रंट को लेकर मौके की तलाश में है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके ने कांग्रेस पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया है। डीएमके ने ऐलान किया है कि वह कभी भी कांग्रेस के साथ मंच पर नहीं दिखेगी। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन में पार्टी ने कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन किया।
कांग्रेस-टीवीके पर अटैक
डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पार्टी की एक बैठक में कांग्रेस और टीवीके पर एसआईआर को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कांग्रेस पर झूठा श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने शुरुआत में छात्रों के आंदोलन से दूरी बनाए रखी और जब युवाओं के दम पर आंदोलन ने जोर पकड़ा, तब इसका श्रेय लेने की कोशिश करने लगी। डीएमके ने टीवीके और बीजेपी के संबंधों पर सवाल उठाया। पार्टी का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर टीवीके की नरमी पर कांग्रेस चुप क्यों है।
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तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी
डीएमके एसआईआर के मुद्दे पर सीजेपी का समर्थन तो कर रही है, लेकिन कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी इंडिया गठबंधन के अलावा नए राजनीतिक विकल्प ढूंढ़ रही है। पार्टी ऐसे क्षेत्रीय दलों को एकजुट कर रही है, जो भाजपा का विरोध तो करते हैं, लेकिन कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन में भविष्य नहीं देख पा रहे। इसे लेकर डीएमके नेताओं ने अन्य क्षेत्रीय दलों से संपर्क साधना शुरु कर दिया है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की है। दूसरी ओर वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी और बीआरएस के साथ भी बातचीत का दौर जारी है।
डीएमके के तीसरे मोर्चे में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस, के चंद्रशेखर राव की बीआरएस और नवीन पटनायक की बीजू जनता दल शामिल होने की संभावना हैं। इनके एक साथ आने से इंडिया गठबंधन की ताकत कमजोर होगी, साथ ही क्षेत्रीय दलों को देश की दो बड़ी पार्टियों बीजेपी-कांग्रेस के अलावा अन्य गुट मिल सकता है।
तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके ने भी इंडिया गठबंधन के कार्यक्रमों से तकीबन दूरी बना रखी है, हालांकि कांगेस और टीवीके के बीच राज्य में सहयोग है। डीएमके टीवीके को लेकर कहती है कि बीजेपी के साथ उसके गुप्त गठबंधन है, जबकि कांग्रेस कहती है टीवीके इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। डीएमके कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप लगाती है। आप पार्टी के नेता कई मौकों पर कह चुकी है कि जहां कांग्रेस का नेतृत्व होगा उनकी पार्टी ऐसे मोर्चों से दूर रहेगी। बीजेडी पहले एनडीए का भी हिस्सा रह चुकी है।
विशेष संसद सत्र को लेकर डीएमके की रणनीति?
राजनीतिक गलियारों में हलचल है कि केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। विशेष सत्र में सरकार की योजना डिलिमिटेशन बिल और महिला आरक्षण विधेयक पेश करने की है। सूत्रों का दावा है कि 22 सांसदों वाली डीएमके सत्तारूढ़ बीजेपी के साथ बातचीत कर रही है, जिसमें सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का भरोसा देकर भाजपा डीएमके का समर्थन पा सकती है।
Created On :   19 Oct 2026 2:43 PM IST













