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छत्तीसगढ़ में बीजेपी के 11 विधायक संसदीय सचिव, क्या EC करेगा कार्रवाई? 

January 20th, 2018 18:05 IST
छत्तीसगढ़ में बीजेपी के 11 विधायक संसदीय सचिव, क्या EC करेगा कार्रवाई? 

डिजिटल डेस्क, रायपुर। दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर शुक्रवार को इलेक्शन कमीशन ने बड़ा झटका देते हुए आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को 'अयोग्य' घोषित कर दिया। ये सभी विधायक केजरीवाल सरकार में संसदीय सचिव थे और ऑफिस ऑफ प्रॉफिट (लाभ का पद) के मामले में इनकी सदस्यता अब खतरे में है। एक तरफ बीजेपी और कांग्रेस जहां अरविंद केजरीवाल से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तो वहीं अब छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी के 11 विधायकों पर एक्शन लेने की मांग कांग्रेस की तरफ से की जा रही है। दरअसल, छत्तीसगढ़ की रमन सरकार में बीजेपी के 11 विधायक भी संसदीय सचिव हैं और कांग्रेस ने इलेक्शन कमीशन से मांग की है कि इन पर भी एक्शन लिया जाए।


बीजेपी के 49 में से 11 विधायक संसदीय सचिव

छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 सीटें हैं और बीजेपी के पास यहां 49 विधायक हैं। बीजेपी के इन विधायकों में 11 विधायक संसदीय सचिव के पद बने हुए हैं। अगर दिल्ली की केजरीवाल सरकार की तरह ही छत्तीसगढ़ पर कोई एक्शन लिया जाता है, तो बीजेपी के पास यहां सिर्फ 38 विधायक रह जाएंगे और रमन सरकार खतरे में पड़ जाएगी। क्योंकि कांग्रेस के पास यहां 39 विधायक हैं और रमन सरकार पर एक्शन होने के बाद वो यहां की सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पहले ही इन 11 विधायकों के कामकाज पर रोक लगा रखी है।

कांग्रेस ने की EC से मांग

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी इलेक्शन कमीशन से मांग की है कि वो संसदीय सचिवों के पद पर काम कर रहे इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रमन सरकार में 11 विधायक, जिन्हें संसदीय सचिव भी बनाया गया है, उनके लिए मंत्रालय में अलग से कैबिन है। 73,000 रुपए सैलरी के अलावा 11,000 रुपए अलग से और मंत्रियों को मिलने वाली ज्यादातर सुविधाएं मिलती रही हैं। अब छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रवक्ता शैलेष नितिन त्रिवेदी ने मीडिया को बताया कि 'अगर दिल्ली में इलेक्शन कमीशन संसदीय सचिवों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश कर सकता है, तो फिर छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं? हम रमन सिंह से मांग करते हैं कि वो नैतिकता के आधार पर अपने संसदीय सचिवों से इस्तीफा लें।'

हाईकोर्ट ने कामकाज पर लगा रही है रोक

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इन 11 संसदीय सचिवों के कामकाज पर रोक लगा रखी है। दरअसल, कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक मोहम्मद अकबर ने इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के पास 22 अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन इन्हें इलेक्शन कमीशन के पास भेजा नहीं गया। जिसके बाद मोहम्मद अकबर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट में याचिका दायर की। मोहम्मद अकबर ने अपनी पिटीशन में हाईकोर्ट से मांग की कि जब तक संसदीय सचिव से जुड़े मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब इन्हें मिलने वाली सुविधाओं और उनके कामकाज पर रोक लगाई जाए। इसके बाद अगस्त 2017 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 11 संसदीय सचिवों के कामकाज करने पर रोक लगा दी। बता दें कि इस मामले में अभी हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।

क्या होता है संसदीय सचिव

दरअसल, संसदीय सचिव का पद वित्तीय लाभ का पद होता है और वो जिस भी मंत्री के साथ जुड़ा होता है, उसके कामों में उसकी मदद करता है। मंत्री के मदद करने के बदले में उसे सैलरी, कार और वाकी जरूरी सुविधाएं भी मिलती हैं। मंत्री के पास ये अधिकार होता है कि वो किसी भी व्यक्ति को अपना संसदीय सचिव नियुक्त कर सकता है। 

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