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पान के पत्ते में होता है शिव, लक्ष्मी, सरस्वती और इन देवों का वास

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 15th, 2017 08:33 IST

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी पूजा पाठ में कुछ विशेष चीजें अति आवश्यक बतायी गई हैं। इन्हीं विशेष वस्तुओं में शामिल है पान का पत्ता। भगवान के पूजन और त्योहार से लेकर शुभ अवसरों तक में पान के पत्ते के महत्व को अस्वीकार नही किया जा सकता। पान के बगैर किसी भी तरह का अनुष्ठान अधूरा माना जाता है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर पत्ते का इस्तेमाल इतना खास माना गया है। 

-स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि पान के पत्ते का प्रयोग देवताओं ने उस वक्त किया था जब समुद्र मंथन किया जा रहा था। इस वजह से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। पूजा-पाठ में पान के पत्ते के शामिल होना आवश्यक बताया गया है। 


-शास्त्रों के अनुसार पान का पत्ता पूजन में अनिवार्य है। यह देवों को प्रिय भी है और इसमें देवों का वास भी होता है। पूजा के वक्त इसका इस्तेमाल करने से शुद्धता आती है साथ ही यह मंगलकार्यों का सूचक है। इससे शुभता का आगमन होता है।

-इसके उपयोग से घर में यदि नकारात्मक ऊर्जा का वास है तो वह दूर हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश संचार होता है

-पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि इन्द्र और शुक्र देव पान के पत्ते के ऊपरी भाग पर विराजमान होते हैं। यही नही इसकी शुभता तब अधिक बढ़ जाती है जब बीच वाले हिस्से में मां सरस्वती और नीचे वालेे हिस्से में माता महालक्ष्मी विराजी हों।

-यही नही भगवान शिव पान के पत्ते के भीतर निवास करते हैं। कामदेव के वास पान के पत्ते के बाहरी हिस्से में होता है।

-क्योंकि कामदेव का भी पान में वास होता है तो इस वजह से ही इसे नवविवाहित जोड़े को सेवन के लिए दिया जाता है, ताकि उनके गृहस्थ जीवन की शुरूआत प्रेमरस से हो सके। 
 

-पान के पत्ते की शुभता का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यह संकट के पलों में शुक्रवार और मंगलवार को हनुमानजी को अर्पित किए जाते हैं। इससे सभी समस्याओं का हल होता है। 

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