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मोदी की अरुणाचल यात्रा पर चीन ने ली आपत्ति, भारत का जवाब- अरुणाचल हमारा है

February 10th, 2019 14:38 IST

हाईलाइट

  • पीएम मोदी की अरुणाचल यात्रा पर चीन की आपत्ति के बाद विदेश मंत्रालय ने शनिवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
  • विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य भारत का 'अभिन्न और अविभाज्य अंग' है।
  • भारतीय नेता समय-समय पर जिस तरह भारत के दूसरे हिस्सों का दौरा करते हैं उसी तरह अरुणाचल प्रदेश का भी दौरा करते हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अरुणाचल यात्रा पर चीन की आपत्ति के बाद विदेश मंत्रालय ने शनिवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। भारतीय नेता समय-समय पर जिस तरह भारत के दूसरे हिस्सों का दौरा करते हैं, उसी तरह अरुणाचल प्रदेश का भी दौरा करते हैं।

इससे पहले दिन में, पीएम मोदी की यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था कि चीन-भारत सीमा को लेकर चीन की पोजिशन स्पष्ट है। चीन की सरकार ने कभी भी कथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी है और हम भारतीय नेता के चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से के दौरे का दृढ़ता से विरोध करते हैं।

चुनयिंग ने कहा कि चीन भारतीय पक्ष से गुजारिश करता है कि वह दोनों देशों के साझा हितों का ध्यान रखें और चीनी पक्ष के हितों और चिंताओं का सम्मान करें। दोनों देशों के बीच संबंधों की प्रगति पर ध्यान दे और उन चीजों से दूर रहे जिनसे विवाद पैदा हो और सीमा मुद्दा जटिल हो।

बता दें कि पीएम मोदी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दो दिवसीय पूर्वोत्तर दौरे पर है। असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में पीएम रैली कर रहे हैं। उन्होंने 4000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और अरुणाचल प्रदेश के होलोंगी में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण की आधारशिला रखी।

चीन भारतीय नेताओं की अरुणाचल प्रदेश की यात्राओं का नियमित तौर पर विरोध करता रहा है और राज्य पर अपना अधिकार बताता रहा है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है। दोनों देशों का यह विवाद 3,488 किलोमीटर की सीमा को लेकर है। दोनों पक्ष मुद्दे को सुलझाने के लिए अपने विशेष प्रतिनिधियों के माध्यम से अब तक 21 राउंड की वार्ता कर चुके हैं।

पिछले साल वुहान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात को आइसब्रेकर के रूप में देखा जा रहा था। इस मुलाकात के बाद बीजिंग ने कहा था कि इस तरह की कार्रवाई दोनों पक्षों की प्रगति को प्रभावित करेगी। 2017 में डोकलाम गतिरोध के बाद भारत और चीन दोनों ही आपसी विश्वास बहाली और संबंध बेहतर करने के प्रयास में लगे हुए हैं।

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