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उप्र में अब स्नातक सीटों पर होगी जोर आजमाइश

October 31st, 2019 20:30 IST
 उप्र में अब स्नातक सीटों पर होगी जोर आजमाइश

हाईलाइट

  • उप्र में अब स्नातक सीटों पर होगी जोर आजमाइश

लखनऊ , 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव होने के बाद अब राजनीतिक दलों का रुख विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की रिक्त सीटों की ओर होगा। इसके लिए सभी दल कमर कसकर जोर आजमाइश करेंगे।

प्रदेश में विधान परिषद के स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आठ-आठ विधान परिषद सदस्य चुने जाते हैं। इन 16 विधान पार्षदों (एमएलसी) में से 11 का कार्यकाल 6 मई, 2020 को पूरा होने जा रहा है। इनमें से पांच एमएलसी स्नातक क्षेत्र के हैं और छह शिक्षक क्षेत्र से हैं।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी इस बार पहली दफा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव लड़ेगी। भाजपा ने स्नातक क्षेत्र में लखनऊ से अवनीश सिंह, प्रयाग से यज्ञदत्त शर्मा, वाराणसी से केदारनाथ सिंह, आगरा से मानवेंद्र सिंह और शिक्षक क्षेत्र में दिनेश वाशिष्ठ, स्नातक क्षेत्र में मेरठ से दिनेश गोयल को और चंद्र शर्मा को शिक्षक क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है, जबकि स्नातक क्षेत्र में बरेली और मुरादाबाद से हरि सिंह ढिल्लो को चुनाव मैदान में उतारा है।

सपा ने भी स्नातक क्षेत्र की सीटों पर उम्मीदवार उताकर इन चुनावों को गंभीरता से लड़ने का संकेत दिया है। सपा ने स्नातक क्षेत्र में लखनऊ से लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महामंत्री राम सिंह राणा को प्रत्याशी बनाया है। राणा कई सालों से सपा के युवा संगठनों से जुड़े हुए हैं। पार्टी ने इलाहाबाद-झांसी से डॉ़ मान सिंह, वाराणसी से आशुतोष सिन्हा और मेरठ से शमशाद अहमद मलिक को उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस और बसपा इस चुनाव में भाग लेंगी या नहीं, इसकी घोषणा अभी नहीं की है।

जिन पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अगले साल चुनाव प्रस्तावित हैं, उनमें वाराणसी, इलाहाबाद-झांसी, आगरा-अलीगढ़, लखनऊ और मेरठ शामिल हैं। स्नातक क्षेत्र की इन पांच सीटों में दो भाजपा, एक सपा, एक निर्दलीय और एक शिक्षक दल के पास है। प्रमुख राजनीतिक दलों ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

उधर, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पूर्व अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी भी इस चुनाव में उतर चुके हैं और आगरा-अलीगढ़ स्नातक क्षेत्र में इस चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर पद से इस्तीफा भी दे दिया है।

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