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प. बंगाल : बीजेपी की यात्रा पर बोलीं ममता- लोगों को मारने के लिए होती हैं दंगा यात्राएं

December 28th, 2018 18:23 IST
प. बंगाल : बीजेपी की यात्रा पर बोलीं ममता- लोगों को मारने के लिए होती हैं दंगा यात्राएं

हाईलाइट

  • बीजेपी की गणतंत्र बचाओ यात्रा पर बिफरी ममता बनर्जी
  • ममता ने कहा- कुछ लोग, अन्य लोगों को मारने के लिए यात्रा निकालते हैं
  • प. बंगाल में यात्रा निकालने के लिए बीजेपी पहुंच चुकी है सुप्रीम कोर्ट

डिजिटल डेस्क, कलकत्ता। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित गणतंत्र बचाओ यात्रा पर सीएम ममता बनर्जी ने निशाना साधा है। उन्होंने इस यात्रा को दंगा यात्रा करार दिया है। ममता ने यह भी कहा है कि इस यात्रा का मकसद लोगों को मारना है। एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए ममता ने कहा, 'ISKCON भी रथ यात्रा निकालता है। ये जगन्नाथ रथ यात्रा निकालते हैं। ये यात्राएं लोगों को मारने के लिए नहीं होती। ये रथ यात्राएं भगवान कृष्ण और जगन्नाथ के लिए निकाली जाती हैं। हम इन यात्राओं में भाग लेते हैं। जबकि कुछ लोग, अन्य लोगों को मारने के लिए यात्रा निकालते हैं, जो कि एक दंगा यात्रा होती है।'

गौरतलब है कि बीजेपी की इस यात्रा को लेकर पश्चिम बंगाल में जमकर बवाल मचा हुआ है। इस यात्रा को पहले कलकत्ता हाईकोर्ट से अनुमति मिल गई थी लेकिन फिलहाल कलकत्ता हाई कोर्ट की डबल बेंच ने अपनी सिंगल बेंच के फैसले पर स्टे लगा दिया है। BJP इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख कर चुकी है। बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच के सामने कलकत्ता हाईकोर्ट के डिविजन बेंच के फैसले को चुनौती दी है।

बीजेपी की यात्रा : अब तक क्या-क्या हुआ
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की गणतंत्र बचाओ यात्रा पहले 7 दिसंबर से प्रस्तावित थी। 6 दिसंबर को हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने बीजेपी को इसके लिए अनुमति देने से मना कर दिया। इसके बाद पार्टी ने डिविजन बेंच की ओर रूख किया। बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को बीजेपी के तीन प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर 14 दिसंबर तक फैसला लेने को कहा।

15 दिसंबर को प्रशासन ने तमाम बातचीत के बाद बीजेपी को यात्रा के लिए परमिशन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद बीजेपी ने हाई कोर्ट का रूख किया, जहां से 20 दिसंबर को यात्रा के लिए अनुमति दे दि गई। 20 दिसंबर को देर शाम टीएमसी ने कोलकाता हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच में सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी, जिसके बाद 21 दिसंबर को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी।

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