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एक-एक वोट की लड़ाई में करीब 6 लाख वोट ले गया NOTA

December 19th, 2017 18:48 IST
एक-एक वोट की लड़ाई में करीब 6 लाख वोट ले गया NOTA

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजे सोमवार को घोषित कर दिए गए और दोनों ही जगह बीजेपी ने अपनी सरकार बनाई है। गुजरात में जहां बीजेपी 6वीं बार सरकार बनाने में कामयाब रही, तो वहीं कांग्रेस के 'हाथ' से हिमाचल प्रदेश को भी बीजेपी ने छीन लिया। दोनों ही राज्यों में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाई है। जबकि 'NOTA' ने इस बार भी गुजरात और हिमाचल दोनों ही राज्यों में खेल बिगाड़ दिया। गुजरात में NOTA जहां चौथे नंबर पर रहा, वहीं हिमाचल प्रदेश में 5वें नंबर पर रहा। अगर NOTA के ये वोट बीजेपी और कांग्रेस में से किसी भी पार्टी को मिलते, तो दोनों ही राज्यों में सीटों का अंतर भी देखने को मिल जाता।


गुजरातियों की पहली पसंद NOTA

सबसे पहले गुजरात विधानसभा की बात करते हैं। गुजरात में बीजेपी 6वीं बार सत्ता में आई है या यूं कहें कि अपने सरकार बचाने में कामयाब रही। इस बार के चुनावों में बीजेपी ने 99 सीटें हासिल की, वहीं उसका वोट शेयर 49.1% रहा, जो पिछली बार के चुनावों से 1% ज्यादा है। जबकि कांग्रेस ने इस बार अच्छा प्रदर्शन किया और 77 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस के वोट शेयर में भी बढ़ोतरी देखने को मिली और पिछली बार से कांग्रेस को 2% ज्यादा यानी 41.4% वोट शेयर मिला। जबकि पिछली बार कांग्रेस को 39% वोट मिला था। वहीं NOTA की बात करें, तो 5 लाख से ज्यादा गुजरातियों की पहली पसंद NOTA ही रही। गुजरात में 5,51,615 वोट NOTA को पड़े, यानी कि 1.8% लोगों को कोई भी पार्टी पसंद नहीं आई। वोट शेयर के मामले में 49.1% (1,47,24,427 वोट) के साथ बीजेपी पहले नंबर पर है, वहीं 41.4% (1,24,38,937 वोट) के साथ कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही। इसके बाद तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार रहे, जिन्हें 4.3% यानी 12,90,278 वोट मिले। चौथे नंबर पर NOTA रहा, जिसपर 1.8% वोट पड़े, जो बीएसपी (0.7%) और एनसीपी (0.6%) को मिले वोटों से भी ज्यादा है।

हिमाचल में 5वें नंबर पर रहा NOTA

वहीं 68 सीटों वाली हिमाचल विधानसभा में भी NOTA का जादू चला। यहां पर NOTA 5वें नंबर पर रही। हिमाचल प्रदेश की 68 सीटों में से बीजेपी ने 44 सीटों पर कब्जा किया और पूर्ण बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाई। वोट शेयर के मामले में बीजेपी यहां भी पहले नंबर पर रही और उसे 48.8% यानी 18,46,432 वोट मिले। कांग्रेस का वोट शेयर 41.7% रहा और उसे 15,77,450 वोट मिले। इसके बाद 6.3% वोट शेयर (2,39,989 वोट) के साथ निर्दलीय उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहे, तो वहीं 1.5% (55,558 वोट)  के साथ चौथे नंबर पर रही। हिमाचल प्रदेश में 0.9% यानी 34,232 वोट NOTA को मिले। यहां भी बीएसपी     0.5% वोट शेयर के साथ NOTA के बाद 6वें नंबर पर रही।

गुजरात में 29 सीटों पर NOTA ने डाला असर

गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से 30 सीटें ऐसी रही, जिसपर सीधे-सीधे NOTA ने असर डाला। राज्य में भले ही बीजेपी अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही हो, लेकिन अगर जो वोट NOTA को गया है, वही वोट कांग्रेस को मिल जाता, तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। इन 29 सीटों में बीजेपी ने 15, कांग्रेस ने 13 और 1 निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। वहीं राज्य में 12 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जहां पर हार-जीत का अंतर 1,000 से भी कम है। अब जैसे पोरबंदर सीट की बात करें, तो इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अर्जुनभाई मोढ़वाडिया बीजेपी के बाबूभाई बोखिरिया से सिर्फ 1,855 वोटों के अंतर से हार गए। जबकि पोरबंदर सीट पर 3,433 वोट NOTA को मिले। अगर यही वोट कांग्रेस के पास जाते, तो यहां पर अर्जुनभाई की जीत तय थी।

2013 में आया था NOTA

इलेक्शन कमीशन ने पहली बार NOTA का ऑप्शन 2013 के विधानसभा चुनावों में दिया था। 2013 में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में NOTA का इस्तेमाल किया गया। सबसे ज्यादा 3.1% वोट NOTA को छत्तीसगढ़ में मिले थे। जबकि मध्यप्रदेश और राजस्थान में 1.9% वोट NOTA को मिले थे। इसके बाद 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में 3.5% वोट NOTA को पड़े थे। 

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