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रथ यात्रा : जगन्नाथ के भात को जगत ने पसारा हाथ, पूरे देश में उत्साह 

July 27th, 2017 15:36 IST
रथ यात्रा : जगन्नाथ के भात को जगत ने पसारा हाथ, पूरे देश में उत्साह 

टीम डिजिटल, भुवनेश्वर। रथ यात्रा का उत्साह आज चरम पर है। श्रद्धालुओं की भीड़ जगन्नाथ पुरी में लाखों में देखी जा सकती है। अमेरिका यात्रा पर गए पीएम मोदी ने भी जगन्नाथ रथ यात्रा पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। ढोल, नगाड़े, नृत्य मंडलियों रथ यात्रा के साथ ही नाचते-गाते चल रहे हैं। इसी प्रकार अहमदाबाद से 140वीं रथ यात्रा निकाली गई। सड़क पर भीड़ लबालब है जितने भक्त रथ को खींचने में लगे हैं उससे कहीं अधिक संख्या देखने वालों की है। इस दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए है। 

रथयात्रा के ठीक एक दिन पहले शनिवार को नेत्रोत्सव का कार्यक्रम मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ। इस दिन भगवान का पूरे विधि-विधान के साथ वैदिक नियम से प्राण प्रतिष्ठा की गई। पूजा-पाठ होने के बाद भोग वितरण किया गया।

सोने के हत्थे से झाड़ू
पूरे देश में अलग-अलग शहरों में रथ यात्रा निकाली गई। पंडित अरविन्द तिवारी के अनुसार जिस भी शहर में रथ यात्रा निकाली जाती है वहां वहां से ग्रह, वास्तु दोष एवं आने वाली आपदा का निवारण हो जाता है। रथयात्रा शुरु होने से पूर्व सोने की हत्थे वाली झाड़ू से भगवान जगन्नाथ के रथ के सामने झाड़ू लगाई गई। इसके बाद मंत्रोच्चार एवं जयघोष के साथ रथयात्रा शुरू हुई। ये परंपरा जगन्नाथ रथयात्रा के आरंभिक काल से ही है। उन दिनों राजाओं के वंशज पारंपरिक ढंग से झाड़ू लगाया करते थे।

पुराणों में वर्णन

जगन्नाथपुरी का वर्णन स्कन्द पुराणए नारद पुराणए पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में मिलता है। जगन्नाथ मंदिर के निजी भृत्‍यों की एक सेना है जो 36 रूपों तथा 97 वर्गों में विभाजित कर दी गई है। पहले इनके प्रधान खुर्द के राजा थे जो अपने को जगन्‍नाथ का भृत्‍य समझते थे।

करीब 100 साल पहले 84 गांवों के लोगों ने शपथ ली थी कि हर हाल में एक साल का पूरा भोग 84 गांवों के लोगों के माध्यम से मंदिर को पहुंचेगा। आज भी लोग इस शपथ को पूरा करते आ रहे है। इसी के बदौलत सालभर में मंदिर का पूरा भोग इन्हीं 84 गांवों के लोगों से ही भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जाता है। इसी कारण इस भोग का नाम देवभोग पड़ा।

विधि-विधान से जारी
सन 1854 को जब मंदिर की आधारशिला तात्कालिक मालगुजार बलभद्र बेहरा द्वारा रखी गईए तो पूरे 84 गावों के लोगों ने श्रमदान करने के साथ ही बेल का गुदाए चिवड़ाए मुर्रा और रेगटा (एक विशेष प्रकार के पत्थर) का चूर्ण पिसकर मंदिर का निर्माण शुरू कियाए जो 46 वर्षों की अथक मेहनत के बाद जाकर पूर्ण हुआ। इसके बाद 1901 में पहली बार नेत्रोत्सव के साथ ही भगवान की रथयात्रा देवभोग में निकाली गई। जो कि आज भी विधि-विधान के साथ लगातार जारी है। जगन्नाथ पुरी का भात महाभोग अति प्रसिद्ध है। 

आ गया छायाचित्र
मंदिर समिति के देवेन्द्र बेहरा बताते हैं कि आज से करीब दस साल पहले 2007 में छह चक्का वाला रथ बनाने की योजना मंदिर के समिति ने बनाई थी। इसके बाद काम भी शुरू कर दिया गया था। जब चार चक्कों का निर्माण पूरा हो गया और पांचवें चक्के का निर्माण शुरू किया गयाए इस दौरान चक्के का निर्माण आधा ही हो पाया था कि उसमें भगवान जगन्नााथ का छायाचित्र आ गया। जिसके बाद समिति ने निर्णय लिया कि यहां भगवान को चार चक्के के रथ से ही रथयात्रा करवाया जाएगा।

बलभद्र जी के रथ का संक्षिप्त परिचय
1. रथ का नाम -तालध्वज रथ
2. कुल काष्ठ खंडो की संख्या -763
3. कुल चक्के -14
4. रथ की ऊंचाई- 44 फीट
5. रथ की लंबाई चौड़ाई - 33 फ़ीट
6. रथ के सारथी का नाम - मातली
7. रथ के रक्षक का नाम-वासुदेव
8. रथ में लगे रस्से का नाम- वासुकि नाग
9. पताके का रंग- उन्नानी
10. रथ के घोड़ो के नाम -तीव्र ,घोर,दीर्घाश्रम,स्वर्ण

भगवान जगन्नाथ जी के रथ का संक्षिप्त परिचय
1. रथ का नाम -नंदीघोष रथ
2.  कुल काष्ठ खंडो की संख्या -832
3. कुल चक्के -16
4. रथ की ऊंचाई- 45 फीट
5. रथ की लंबाई चौड़ाई - 34 फ़ीट 6 इंच
6. रथ के सारथी का नाम - दारुक
7. रथ के रक्षक का नाम- गरुड़
8. रथ में लगे रस्से का नाम- शंखचूड़ नागुनी
9.पताके का रंग- त्रैलोक्य मोहिनी
10. रथ के घोड़ो के नाम -वराह,गोवर्धन,कृष्णा,गोपीकृष्णा,नृसिंह,राम,नारायण,त्रिविक्रम,हनुमान,रूद्र 

सुभद्रा जी के रथ का संक्षिप्त परिचय
1. रथ का नाम - देवदलन रथ
2. कुल काष्ठ खंडो की संख्या -593
3. कुल चक्के -12
4. रथ की ऊंचाई- 43 फीट
5. रथ की लंबाई चौड़ाई - 31 फ़ीट 6 इंच
6. रथ के सारथी का नाम - अर्जुन
7. रथ के रक्षक नाम- जयदुर्गा
8. रथ में लगे रस्से का नाम- स्वर्णचूड़ नागुनी
9. पताके का रंग- नदंबिका
10. रथ के घोड़ो के नाम -रुचिका,मोचिका, जीत,अपराजिता

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