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जिनपिंग का भारत दौरा, पीएम मोदी के साथ किया डिनर, व्यापार से लेकर आतंकवाद पर चर्चा


हाईलाइट

  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चेन्नई पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की
  • पीएम ने जिनपिंग को अर्जुन तपस्या स्थली और तट मंदिर के दर्शन कराए और इन स्थलों का महत्व समझाया
  • दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेने के बाद साथ में डिनर किया

डिजिटल डेस्क महाबलीपुरम। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शुक्रवार को चेन्नई पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की। पीएम ने मामल्लपुरम (महाबलीपुरम)  में जिनपिंग को अर्जुन तपस्या स्थली और तट मंदिर के दर्शन कराए और इन स्थलों का महत्व समझाया। इसके बाद दोनों ने पंच रथ स्थल पर नारियल पानी पिया और अनौपचारिक बातचीत की शुरुआत की। पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को नचियारकोइल-ब्रांच अन्नम लैंप और थंजावुर स्टाइल की पेंटिंग भी गिफ्ट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार से लेकर आतंकवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा हुआ। चीनी राष्ट्रपति का यह दौरा 48 घंटे का है।

नारियल पानी पीने के बाद पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति 700-728 ईस्वी के दौरान समुद्र के निकट निर्मित शोर मंदिर पहुंचे। यह महाबलीपुरम का प्रमुख तीर्थ स्थान है। मंदिर में तीन स्थल हैं, जिनमें दो भगवान शिव और एक भगवान विष्णु को समर्पित है। शोर मंदिर में विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रसाद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी चीनी राष्ट्रपति ने मुलाकात की। मंदिर के पास सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसका पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति ने आनंद लिया। इसके बाद दोनों नेता मंच पर पहुंचे और कलाकारों के साथ तस्वीर खिंचाई।

दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेने के बाद साथ में डिनर किया। डिनर में दोनों नेताओं को पारम्परिक दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे गए। दालों से बनाया जाने वाला पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन 'सांभर' के साथ पिसी दाल, विशेष मसालों और नारियल से तैयार की जाने वाली 'अराचु विट्टा सांभर' मेन्यू में आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इसके अलावा टमाटर से बनी थक्‍कली रसम, इमली, कदलाई कुरुमा और मिष्ठान में हलवा समेत विभिन्न व्यंजन परोसे गए। चीनी राष्ट्रपति के लिए चुनिंदा मांसाहारी व्यंजन भी तैयार किए गए थे।

मोदी और जिनपिंग की मुलाकात की जानकारी देते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लगभग 5 घंटे साथ समय बिताया। इस दौरान व्यापार से संबंधित और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा हुई। ट्रेड वॉल्यूम और ट्रेड वैल्यू को कैसे बढ़ाया जाए इस पर भी दोनों ने चर्चा की। इस चर्चा में व्यापार घाटा और असंतुलित व्यापार का मुद्दा भी शामिल रहा। 

इसके अलावा कुछ अन्य विषयों में आतंकवाद के कारण दोनों देशों के सामने आने वाली चुनौतियां और कट्टरता से निपटना शामिल था। दोनों ने कट्टरता और आतंकवाद का असर हमारे समाजों पर न पड़े इसके लिए साथ मिलकर काम करने की बात कही।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ विदेश मंत्री वांग यी और स्टेट काउंसलर यांग जिएची सहित 100 सदस्यीय मजबूत प्रतिनिधिमंडल आया है। चीनी प्रतिनिधमंडल में सीपीसी केंद्रीय कमेटी व राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य डिंग शुईशियांग, स्टेट काउंसलर यांग जिएची, विदेश मंत्री वांग यी, चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस की राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष एचई लाइफेंग व अन्य लोग शामिल हैं।

दोनों दिग्गज अपने इस द्वितीय शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय संबंधों के साथ वैश्विक मुद्दों और कश्मीर पर भी पर चर्चा कर सकते हैं। विश्व की इन दो शक्तियों के बीच अब तक 14 बार मुलाकात हो चुकी है लेकिन उनके बीच अनौपचारिक मुलाकात सिर्फ एक बार ही हुई है। इससे पहले अनौपचारिक सम्मेलन के लिए मोदी और जिनपिंग अप्रैल 2018 में चीन के वुहान शहर में मिले थे।

तस्वीरों में देखें जिनपिंग का भारत दौरा:

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